नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा। खेड़ा ने यह भी कहा कि जहां भी INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने से रोका जाएगा, वहां विरोध दर्ज कराया जाएगा।
पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन का एजेंडा पहले भी स्पष्ट था और अब भी वही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी किसी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है। उनके मुताबिक, विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "एजेंडा नहीं बदला है। एजेंडा वही है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा। यह केवल INDIA गठबंधन की मांग नहीं है, बल्कि पूरे देश की मांग है। INDIA गठबंधन भारत की मांग को लेकर सड़कों पर है। जहां भी हमें रोका जाएगा, वहां विरोध प्रदर्शन होगा।"हालांकि, पूरे देश की मांग होने का दावा पवन खेड़ा का राजनीतिक बयान है। इस मुद्दे पर सभी नागरिकों की एक जैसी राय होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के कार्यालय जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई। हुड्डा के अनुसार, विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी बात चुनाव आयोग तक पहुंचाना चाहते थे।दीपेंद्र हुड्डा ने बताया कि बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की भी अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर सवाल उठाए और विपक्षी नेताओं को रोके जाने का मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं और इसके लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता अपना रहे हैं।दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर INDIA गठबंधन के सांसद बीते कई दिनों से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार, 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। इसके बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर की ओर जाने के दौरान भी विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच गतिरोध की स्थिति बनी। इस दौरान राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था।
बुधवार के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंचना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने वहीं विरोध दर्ज कराया। पुलिस कार्रवाई के बाद कांग्रेस और गठबंधन के अन्य नेताओं ने प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की।गुरुवार को भी विपक्षी सांसदों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन करने का प्रयास किया। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और जंतर-मंतर के आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने एक बार फिर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।कांग्रेस और INDIA गठबंधन के इस आंदोलन के केंद्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े विवाद भी हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं का निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से काम करना जरूरी है। कांग्रेस ने इसी आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है।दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में गलत आचरण तथा राजनीतिक पक्षपात से जुड़े आरोपों का खंडन किया है। इस मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।कांग्रेस ने अपने विरोध को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से 8 अक्टूबर को राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई थी। कांग्रेस का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर उसका अभियान जारी रहेगा।
इसके अलावा विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का समय मांगने की पहल भी की है। विपक्ष राष्ट्रपति के समक्ष मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित अपनी चिंताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग रखना चाहता है।पवन खेड़ा के ताजा बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस फिलहाल अपनी मांग से पीछे हटने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोके जाने के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही है। वहीं, दीपेंद्र हुड्डा ने चुनाव आयोग तक पहुंचने और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है।मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर जारी इस राजनीतिक टकराव ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के अधिकार को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल कांग्रेस और INDIA गठबंधन अपनी मांग पर कायम हैं और आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की बात कह रहे हैं।
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