नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण किया और वहां कचरा हटाने के काम की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कचरे के पहाड़ के साथ अपनी "आखिरी सेल्फी" लेने की बात कही और दावा किया कि यह पहाड़ जल्द ही खत्म हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली को कचरे के पहाड़ों से मुक्त करने के लिए प्रशासन मिशन मोड में काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने ओखला में कचरा निस्तारण से जुड़े काम का निरीक्षण करने के साथ अधिकारियों से आगे की कार्ययोजना की जानकारी भी ली। इसी दिन ओखला, गाजीपुर और सिंघोला में नई वेस्ट प्रोसेसिंग सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। इनका उद्देश्य रोजाना पैदा होने वाले नए कचरे और निर्माण एवं विध्वंस से निकले मलबे को प्रोसेस करना है, ताकि पुराने कचरे को हटाने के साथ नया कचरा पहाड़ का रूप न ले सके।
निरीक्षण के बाद रेखा गुप्ता ने कहा कि उन्होंने कचरे के पहाड़ के साथ अपनी आखिरी सेल्फी ली है और उनका संकल्प है कि यह पहाड़ जल्द खत्म हो जाए। उन्होंने कहा कि लैंडफिल पर जमा कचरे की मात्रा पिछले करीब डेढ़ साल में लगातार कम हुई है। मुख्यमंत्री ने इसे दिल्ली की स्वच्छता व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार पिछले डेढ़ साल में दिल्ली की तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों- ओखला, भलस्वा और गाजीपुर से करीब 100 एकड़ जमीन खाली करा चुकी है। अगस्त के अंत में भी सरकार ने यही आंकड़ा जारी करते हुए बताया था कि ओखला में करीब 35 एकड़, भलस्वा में 45 एकड़ और गाजीपुर में लगभग 20 एकड़ जमीन कचरे से मुक्त कराई गई है।
रेखा गुप्ता ने ओखला की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जनवरी 2025 से पहले यहां जमा लगभग पूरा पुराना कचरा प्रोसेस किया जा चुका है। सरकार के मुताबिक, अब प्रयास इस बात पर केंद्रित है कि एक तरफ पुराने यानी 'लेगेसी वेस्ट' को खत्म किया जाए और दूसरी तरफ रोजाना आने वाले नए कचरे को उसी समय प्रोसेस करने की क्षमता बढ़ाई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कचरा प्रबंधन के मोर्चे पर दो स्तरों पर काम कर रही है। पहला लक्ष्य वर्षों से जमा कचरे को हटाकर लैंडफिल की जमीन को खाली कराना है। दूसरा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर से निकलने वाला नया कचरा दोबारा इन स्थानों पर जमा होकर नया पहाड़ न बनाए। इसके लिए नई वेस्ट प्रोसेसिंग क्षमता विकसित की जा रही है।
ओखला में प्रतिदिन 1,400 मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस करने की क्षमता वाली सुविधा का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा सिंघोला में 800 मीट्रिक टन और गाजीपुर में 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन की प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन सुविधाओं के जरिए नए कचरे को लगातार प्रोसेस करने पर जोर रहेगा।
दिल्ली के लिए लैंडफिल साइट लंबे समय से पर्यावरण और शहरी प्रबंधन की बड़ी चुनौती रही हैं। ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में वर्षों से जमा कचरे के कारण इन इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानियां भी चर्चा का विषय रही हैं। सरकार का कहना है कि कचरे को हटाने के साथ खाली हुई जमीन को उपयोगी और हरित क्षेत्र में बदलने पर भी काम किया जा रहा है।
हालांकि ओखला लैंडफिल को पूरी तरह खत्म करने की समय-सीमा पहले भी कई बार आगे बढ़ाई गई है। मई 2026 में सामने आई एमसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, ओखला लैंडफिल को खत्म करने का लक्ष्य जुलाई 2026 से बढ़ाकर अक्टूबर 2026 किया गया था। रिपोर्ट में नए कचरे के लगातार पहुंचने और मानसून के दौरान काम की गति प्रभावित होने को चुनौतियों में गिना गया था।
इसी वजह से सरकार अब केवल पुराने कचरे की बायोमाइनिंग और प्रोसेसिंग पर निर्भर रहने के बजाय नए कचरे के तत्काल निस्तारण पर भी जोर दे रही है। अगर रोजाना निकलने वाला कचरा लगातार प्रोसेस होता रहेगा तो लैंडफिल पर नए कचरे का दबाव कम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कचरा हटाने की प्रक्रिया अब जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लक्ष्य और समय-सीमा तय कर रखी है और हजारों टन कचरे को रोजाना प्रोसेस किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य दिल्ली को कचरे के पहाड़ों से पूरी तरह मुक्त करना है।
लैंडफिल से खाली कराई गई जमीन को हरा-भरा बनाने की योजना भी सरकार की स्वच्छता रणनीति का हिस्सा है। इससे उन इलाकों के पर्यावरण में सुधार लाने के साथ जमीन का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है। हालांकि कचरे के पहाड़ों को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए पुराने कचरे को हटाने के साथ नए कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण लगातार जारी रखना जरूरी होगा।
ओखला लैंडफिल पर मुख्यमंत्री की "आखिरी सेल्फी" इसी अभियान का प्रतीकात्मक संदेश बन गई है। सरकार ने दावा किया है कि पुराने कचरे को तेजी से हटाया जा रहा है और नई प्रोसेसिंग सुविधाओं के जरिए भविष्य में नए कचरे के पहाड़ बनने से रोकने की तैयारी की जा रही है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ओखला सहित दिल्ली की तीनों प्रमुख लैंडफिल साइटों को पूरी तरह साफ करने के निर्धारित लक्ष्यों को कितनी जल्दी हासिल किया जाता है।
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