CJP प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप, पुलिस पर पथराव के बाद 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में
पथराव और तोड़फोड़ में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, 70 हिरासत में
DELHI-NCR: राजधानी में आयोजित CJP (जॉइंट पीपुल्स फ्रंट/संगठन के नाम के अनुसार) के संसद मार्च के दौरान हालात अचानक हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। अधिकारियों के अनुसार हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
प्रशासन ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।
कैसे भड़की हिंसा?
जानकारी के अनुसार, संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को निर्धारित बैरिकेड पर रोका गया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया और इसके बाद पथराव शुरू हो गया। कई सरकारी और निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि सार्वजनिक संपत्ति को भी क्षति पहुंचने की खबर है।
118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हिंसक झड़प के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी घायल हुए। कई पुलिसकर्मियों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं, जिनका अस्पताल में इलाज कराया गया। कुछ जवानों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर रूप से घायल कर्मियों का उपचार जारी है।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात जवानों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं, जिससे कई कर्मी घायल हुए।
70 प्रदर्शनकारी हिरासत में
हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में पुलिस ने 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरों और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है ताकि हिंसा में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
पुलिस ने कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना के बाद संसद और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा नियंत्रण इकाइयों और त्वरित कार्रवाई बल (RAF) की तैनाती की गई। कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई, जिससे यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
प्रदर्शनकारियों का पक्ष
प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों का आरोप है कि उनकी शांतिपूर्ण रैली को आगे बढ़ने से रोका गया, जिसके बाद तनाव बढ़ा। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए तय शर्तों का उल्लंघन किया गया और कुछ लोगों ने हिंसक गतिविधियों में हिस्सा लिया।
घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसकी जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
जांच जारी
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषियों की पहचान की जाएगी। यदि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या पुलिस पर हमले में किसी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।