नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। उनका जोर इस बात पर रहा है कि किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसी बीच निर्वाचन आयोग ने दिल्ली सहित छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं की समय-सीमा बढ़ा दी है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 25 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
निर्वाचन आयोग ने 29 अक्टूबर को जारी आदेशों में दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नगालैंड के लिए संशोधित कार्यक्रम घोषित किया। आयोग के अनुसार, नई समय-सीमा का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े दावों, आपत्तियों और उनके निस्तारण के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है। दिल्ली में पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर थी, जिसे बढ़ाकर 25 नवंबर कर दिया गया है। इसके साथ ही दावों के निस्तारण की समय-सीमा 15 दिसंबर और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तारीख 22 दिसंबर निर्धारित की गई है।
चंद्रशेखर आजाद लंबे समय से SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग करते रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि मतदाता सूचियों में संशोधन के दौरान गरीब, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और अन्य वंचित वर्गों के पात्र नागरिकों के नाम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप और आशंकाएं हैं, जिन्हें निर्वाचन आयोग की ओर से प्रमाणित निष्कर्ष के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है।
चंद्रशेखर आजाद ने 27 अक्टूबर को प्रयागराज में मीडिया से बातचीत के दौरान SIR प्रक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण की मौजूदा प्रक्रिया पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने डिजिटल मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर मतदाता रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आजाद ने मुजफ्फरनगर के मीरापुर क्षेत्र से संबंधित कुछ मतदाता रिकॉर्ड का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि एक ही व्यक्ति से जुड़े कई मतदाता रिकॉर्ड सामने आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतदाता सूची में ऐसी कथित विसंगतियां मौजूद हों, तो चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इससे पहले भी निर्वाचन आयोग से SIR प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। नवंबर 2025 में उन्होंने मतदाता सूची संशोधन के दौरान तकनीकी समस्याओं और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर बढ़ते कार्यभार को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि कई स्थानों पर ऑनलाइन पोर्टल धीमा होने के कारण आवेदन अपलोड करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने यह आशंका भी जताई थी कि पर्याप्त समय नहीं मिलने पर कुछ पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल होने से रह सकते हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान देने की अपील की थी। उनका कहना था कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और नागरिकों को अपने मताधिकार के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से मतदाता सूची में अपना नाम जांचने और किसी प्रकार की त्रुटि होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने पर जोर दिया था।
इधर, निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 13 नवंबर तक बढ़ा दी है। वहां संबंधित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया 25 नवंबर तक जारी रहेगी और अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। इसी तरह हरियाणा और आंध्र प्रदेश में नोटिस तथा दावों के निस्तारण की अवधि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई है।
तेलंगाना में संबंधित प्रक्रिया 26 नवंबर और नगालैंड में 25 नवंबर तक जारी रहेगी। इन राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। हालांकि, सभी स्थानों पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख समान नहीं है। इसलिए मतदाताओं को अपने राज्य के संशोधित कार्यक्रम की जानकारी संबंधित निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त करनी चाहिए।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मुद्दे ने भी विवाद को जन्म दिया है। 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में लगभग 47.56 लाख नाम शामिल नहीं थे। इनमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव वाले रिकॉर्ड से संबंधित प्रविष्टियां शामिल थीं। इसके बाद 28 अक्टूबर तक नाम शामिल कराने के लिए 2,75,856 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6, नाम हटाने से संबंधित आपत्ति के लिए फॉर्म-7 और विवरण में सुधार या संशोधन के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जाता है। आयोग की ओर से निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पात्र नागरिक संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली में SIR की समय-सीमा बढ़ाने का फैसला ऐसे समय आया, जब सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से दावे और आपत्तियों की अवधि बढ़ाने पर विचार करने को कहा था। इसके बाद आयोग ने संशोधित कार्यक्रम जारी किया।
SIR को लेकर विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि कोई पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न हो। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों को अद्यतन करने, त्रुटियों को सुधारने और अपात्र या दोहराव वाली प्रविष्टियों की पहचान करने की प्रक्रिया पर जोर देता रहा है।
अब समय-सीमा बढ़ने के बाद मतदाताओं को अपने नाम और अन्य विवरण की जांच करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिला है। चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं की ओर से उठाए गए सवालों के बीच यह विषय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में संशोधित मतदाता सूचियों के प्रकाशन और दावों के निस्तारण के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
संपादकीय नोट: समय-सीमा बढ़ने की पुष्टि हुई है। हालांकि, “एक भी वोट छूटना नहीं चाहिए” शब्दों वाला चंद्रशेखर आजाद का 30 अक्टूबर का नया बयान स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका। खबर में उनके पूर्व प्रकाशित बयानों और निर्वाचन आयोग के ताजा आदेश को अलग-अलग संदर्भों में प्रस्तुत किया गया है।
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