पराली प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार की बड़ी समीक्षा बैठक, नई रणनीति पर जोर
Delhi दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पराली प्रबंधन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में दोनों मंत्रालयों की संयुक्त टीम ने देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली जलाने की वजह से न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है, बल्कि यह धरती की उर्वरता और “धरती माता के स्वास्थ्य” के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि खेतों में पराली जलाने की आवश्यकता ही समाप्त हो जाए और किसानों को इसके विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस बार सरकार की रणनीति और अधिक व्यापक होगी। उन्होंने कहा कि धान की बुआई के समय ही ऐसी योजना बनाई जाएगी जिससे पराली खेतों में न जले और उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन हो सके। इसके लिए किसानों को मशीनरी, तकनीकी सहायता और आर्थिक सहयोग देने पर भी विचार किया जा रहा है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्यों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों के बारे में बेहतर तरीके से समझाया जा सके। साथ ही वैकल्पिक उपयोग जैसे बायो-एनर्जी, खाद निर्माण और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो उत्तर भारत में हर साल सर्दियों के दौरान होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण में काफी कमी लाई जा सकती है।