नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एक दर्दनाक हादसे के बाद अब निजी पीजी (Paying Guest) और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। दक्षिण दिल्ली के **सत्य निकेतन इलाके में पीजी इमारत गिरने से 7 छात्रों की मौत** के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। हादसे के बाद सामने आया कि कई इलाकों में पुरानी और कमजोर इमारतों में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में **200 से ज्यादा पीजी इमारतें संवेदनशील या खतरनाक श्रेणी में चिन्हित** की गई हैं। अब इन इमारतों की दोबारा जांच और सुरक्षा ऑडिट कराने की तैयारी शुरू हो गई है।
सत्य निकेतन हादसे ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
सत्य निकेतन में हुए हादसे ने दिल्ली के छात्र इलाकों में चल रहे निजी हॉस्टल और पीजी व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है। बताया जा रहा है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था थी और निर्माण से जुड़े कई सवाल जांच के दायरे में हैं।
हादसे के बाद प्रशासन ने माना कि कई इलाकों में पुरानी इमारतों का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किया जा रहा है, लेकिन उनकी मजबूती और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच नहीं हो रही थी।
200 से ज्यादा पीजी पर खतरा
दिल्ली के कई बड़े छात्र इलाकों में बड़ी संख्या में निजी पीजी संचालित होते हैं। इनमें विजय नगर, जीटीबी नगर, सत्य निकेतन, लक्ष्मी नगर और मुखर्जी नगर जैसे इलाके शामिल हैं, जहां हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और पढ़ाई के लिए रहते हैं।
इन इलाकों में कई पुरानी इमारतों को किराए के कमरों और पीजी में बदल दिया गया है। संकरी गलियां, कमजोर ढांचा, आग से बचाव के इंतजामों की कमी और अवैध निर्माण जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।
अब होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी और हॉस्टल इमारतों की सुरक्षा जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।
इस जांच में इमारत की मजबूती, फायर सेफ्टी व्यवस्था, अवैध निर्माण, बेसमेंट का इस्तेमाल और आपातकालीन रास्तों की जांच की जाएगी।
MCD अधिकारियों पर भी गिरी गाज
हादसे के बाद प्रशासन ने लापरवाही के आरोप में नगर निगम के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, MCD के डिप्टी कमिश्नर, इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
सरकार का कहना है कि अगर जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
दिल्ली में लाखों छात्र पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की होती है जो निजी पीजी और हॉस्टल में रहते हैं।
छात्रों का कहना है कि कई जगहों पर किराया तो अधिक लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई पीजी में फायर एग्जिट, अग्निशमन उपकरण और इमरजेंसी व्यवस्था तक पर्याप्त नहीं होती।
किराए के बदले मिल रही असुरक्षा?
राजधानी के कई इलाकों में पीजी संचालक एक कमरे में क्षमता से ज्यादा छात्रों को रखने की शिकायतों से भी घिरे रहते हैं। छोटे कमरों में ज्यादा बेड लगाने से न केवल रहने की स्थिति खराब होती है बल्कि आपात स्थिति में बाहर निकलना भी मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के लिए केवल किराए के मकानों की जांच काफी नहीं है, बल्कि पीजी संचालन के लिए स्पष्ट नियम और नियमित निगरानी जरूरी है।
नई नीति की तैयारी
हादसे के बाद दिल्ली में पीजी और हॉस्टल के लिए नई सुरक्षा नीति बनाने की मांग भी तेज हो गई है। इसमें रजिस्ट्रेशन, सुरक्षा प्रमाण पत्र, नियमित निरीक्षण और मानकों का पालन अनिवार्य किए जाने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और छात्रों को सुरक्षित रहने की सुविधा मिल सके।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता
हादसे के बाद देशभर के उन अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है जिनके बच्चे दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। कई परिवार अब अपने बच्चों के रहने की जगह और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
अभिभावकों की मांग है कि सरकार सभी पीजी और हॉस्टल की जांच कराए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।
आगे क्या होगा?
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली के सभी पीजी और हॉस्टल की स्थिति की जांच करना है। जो इमारतें कमजोर या असुरक्षित पाई जाएंगी, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
सत्य निकेतन हादसे ने यह साफ कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि जरूरी व्यवस्था है। समय रहते कदम उठाए गए तो भविष्य में कई हादसों को रोका जा सकता है।