अभ्यर्थियों का फूटा आक्रोश, परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

Update: 2026-07-25 11:45 GMT

नई दिल्ली  :   राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान युवाओं और अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। आंदोलन के बीच रॉयल बुलेटिन की टीम लगातार ग्राउंड जीरो से पूरे घटनाक्रम को कवर करती रही और प्रदर्शनकारियों की आवाज को सामने रखा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा से पहले जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और युवा नेताओं ने अपनी चिंताओं को खुलकर व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

आंदोलन में शामिल छात्र-छात्राओं का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के करियर का आधार होती हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं तो इसका सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं की चिंताओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया। उनका कहना था कि लंबे समय तक आंदोलन और विरोध के बावजूद उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुना गया, जिसके कारण छात्रों में नाराजगी बढ़ती गई।

जंतर-मंतर पर मौजूद युवा नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति या एक घटना के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम करने और युवाओं के अधिकारों की मांग से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्र चाहते हैं कि भर्ती और परीक्षा प्रक्रियाएं पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हों।

आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि देशभर के छात्र कड़ी मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी उनकी मेहनत और उम्मीदों को प्रभावित करती है। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

रॉयल बुलेटिन की टीम ने आंदोलन स्थल से छात्रों और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रियाओं को सामने रखा। कैमरे पर कई युवाओं ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी आवाज को सुना जाए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

आंदोलन के दौरान छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाने की बात कही। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना उनका अधिकार है और वे इसी माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर के बाद आंदोलन स्थल का माहौल बदल गया और प्रदर्शनकारियों में उत्साह दिखाई दिया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं और इन पर आगे भी ध्यान देने की जरूरत है।

जंतर-मंतर का यह आंदोलन एक बार फिर युवाओं से जुड़े रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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