नई दिल्ली। भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता और हथियार निर्यात में बढ़ोतरी के बीच रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को देश की प्रमुख निर्यात सफलताओं में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस सिस्टम का निर्यात 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने की दिशा में बढ़ रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस के बाद वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति को लेकर समझौते आगे बढ़े हैं।
रक्षा सचिव के मुताबिक ब्रह्मोस की मांग यह दिखाती है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब केवल घरेलू जरूरतों के लिए सैन्य प्रणालियां तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हाई-एंड रणनीतिक हथियारों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस आपूर्ति समझौते की पुष्टि मई 2026 में की थी, जबकि जुलाई में भारत और इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर सहयोग से संबंधित समझौता किया।
राजेश कुमार सिंह ने कहा कि फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया के रूप में दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों के साथ ब्रह्मोस निर्यात का दायरा बढ़ा है। उनके अनुसार इससे मिसाइल सिस्टम के कुल निर्यात मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रक्षा सचिव ने इसे भारत के रक्षा निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का पहला विदेशी ग्राहक बना था। उसने वर्ष 2022 में भारत के साथ करीब 375 मिलियन डॉलर मूल्य का समझौता किया था। इसके बाद भारत ने मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति शुरू की। फिलीपींस को ब्रह्मोस की बिक्री ने अन्य देशों के लिए भी भारतीय मिसाइल सिस्टम के निर्यात का रास्ता खोला।
रक्षा सचिव के मुताबिक अब वियतनाम और इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस निर्यात के महत्वपूर्ण बाजार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि वियतनाम के लिए शुरुआती निर्यात का मूल्य लगभग 100 मिलियन डॉलर और इंडोनेशिया के लिए करीब 200 मिलियन डॉलर के आसपास हो सकता है। हालांकि इन समझौतों की विस्तृत व्यावसायिक शर्तें सार्वजनिक रूप से पूरी तरह जारी नहीं की गई हैं।
इंडोनेशिया के मामले में जुलाई 2026 में दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर सहयोग को आधिकारिक समझौतों की सूची में शामिल किया गया था। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक इंडोनेशिया दो ब्रह्मोस बैटरियों की खरीद पर आगे बढ़ा है, जिनका मूल्य लगभग 200 मिलियन डॉलर बताया गया है।
वियतनाम के साथ भी भारत के रक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा सचिव ने मई में सार्वजनिक रूप से पुष्टि की थी कि ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति को लेकर वियतनाम के साथ समझौता हो चुका है। उस समय इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में बताया गया था। बाद में जुलाई में इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस सहयोग पर समझौता सामने आया।
ब्रह्मोस की खासियत केवल इसके जमीन या समुद्र से इस्तेमाल होने वाले संस्करण तक सीमित नहीं है। रक्षा सचिव ने इसके हवा से लॉन्च किए जाने वाले संस्करण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एयर-लॉन्च ब्रह्मोस को भारतीय वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमानों पर सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। इससे भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी से महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर तेज और सटीक हमला करने की क्षमता मिलती है।
ब्रह्मोस को भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने विकसित किया है। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम है, जिसके अलग-अलग संस्करणों को जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च करने के लिए विकसित किया गया है। भारत ने इसके उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं को लगातार बढ़ाया है।
रक्षा सचिव के बयान के मुताबिक ब्रह्मोस की सफलता भारत की उस रणनीति से भी जुड़ी है, जिसके तहत देश घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के साथ निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारतीय रक्षा उद्योग की ओर से मिसाइल, गोला-बारूद, नौसैनिक प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दूसरे सैन्य उत्पाद अब कई देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया ब्रह्मोस के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात क्षेत्र के रूप में सामने आया है। फिलीपींस के बाद वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ हुए समझौते इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती रक्षा औद्योगिक साझेदारी को दिखाते हैं। हालांकि इन समझौतों का रणनीतिक महत्व भी है, लेकिन प्रत्येक देश की खरीद उसकी अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के तहत होती है।
इंडोनेशिया के साथ हुए समझौते में ब्रह्मोस के अलावा एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग भी शामिल है। भारत सरकार की जुलाई 2026 की आधिकारिक सूची में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम सहयोग और एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग दोनों को दर्ज किया गया था।
रक्षा सचिव ने ब्रह्मोस को भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमता के प्रमुख उदाहरण के रूप में पेश किया। उनके मुताबिक मिसाइल सिस्टम की अंतरराष्ट्रीय मांग भारतीय डिजाइन, उत्पादन और रक्षा तकनीक की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
फिलीपींस को पहले ही ब्रह्मोस सिस्टम की आपूर्ति और अब वियतनाम तथा इंडोनेशिया के साथ आगे बढ़ते समझौतों के बाद इस मिसाइल के निर्यात का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। रक्षा सचिव के आकलन के अनुसार कुल ब्रह्मोस निर्यात 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े से आगे जा सकता है। इससे भारत की रक्षा निर्यात रणनीति में ब्रह्मोस की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होने की संभावना है।