नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने गुरुवार को राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक मुद्दों पर बहस सड़क पर नहीं, बल्कि संसद के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की संसदीय कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जो नेता संसद में लगातार पांच-छह मिनट नहीं बैठ सकता, वह प्रधानमंत्री के साथ बहस करने की चुनौती दे रहा है। पात्रा के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।संबित पात्रा ने राहुल गांधी की खुली बहस की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है। सरकार और विपक्ष के बीच किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर चर्चा करने के लिए संसद की व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में प्रधानमंत्री को सार्वजनिक मंच पर बहस की चुनौती देने का क्या औचित्य है? उन्होंने सवाल किया कि जनप्रतिनिधियों के बीच गंभीर बहस संसद में होनी चाहिए या सड़कों पर।भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर पर्याप्त आंकड़े और जानकारी नहीं होती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता को पहले संसद में गंभीरता से चर्चा करने की आदत विकसित करनी चाहिए। पात्रा के अनुसार, सार्वजनिक मंचों पर चुनौती देना आसान है, लेकिन संसद में तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखना अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि, ये संबित पात्रा के राजनीतिक आरोप हैं और राहुल गांधी की संसदीय भागीदारी का स्वतंत्र आकलन नहीं हैं।
दरअसल, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी भी मंच पर आमने-सामने बहस करने की चुनौती दी थी। उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति, भारत-अमेरिका समझौते, अदाणी समूह से जुड़े विवादों और विदेशी प्रभाव के आरोपों सहित कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा था। राहुल गांधी का कहना था कि प्रधानमंत्री स्थान और मंच तय कर सकते हैं और वह वहां चर्चा के लिए तैयार हैं। कांग्रेस नेता ने अपनी चुनौती दोहराते हुए सवाल उठाया था कि प्रधानमंत्री इस बहस के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं।राहुल गांधी की चुनौती के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने जवाब दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पास बहस करने के लिए संसद जैसा संवैधानिक मंच पहले से उपलब्ध है। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी संसद में चर्चा करने के बजाय बाहर खुली बहस की मांग क्यों कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि संसद में चर्चा होने पर सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और बहस आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा बनती है।इस राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी को संसद में बहस करने की चुनौती दी है। शाह ने चुनावी प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की सरकार की तत्परता जताई। उन्होंने विपक्ष से कहा कि यदि उसके पास गंभीर सवाल और प्रमाण हैं, तो वह संसद में आकर चर्चा करे।संबित पात्रा ने राहुल गांधी के साथ विपक्षी इंडिया गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने हाल में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी कार्यक्रम का जिक्र करते हुए दावा किया कि गठबंधन के नेताओं ने बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की बात कही थी, लेकिन वास्तविक उपस्थिति उनके दावों से काफी कम रही। यह आंकड़ा पात्रा का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पात्रा ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के राजनीतिक संबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में दोनों दल एक-दूसरे के साथ दिखाई देते हैं, जबकि पंजाब की राजनीति में एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हैं। भाजपा नेता ने राहुल गांधी को सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री के साथ बहस की मांग करने से पहले वह अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ राजनीतिक मतभेदों पर चर्चा करें। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी वास्तव में राजनीतिक सहयोगी हैं या विरोधी।गौरतलब है कि विपक्षी इंडिया गठबंधन ने हाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं। दूसरी ओर, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने दिल्ली में प्रदर्शन और सांकेतिक संसदीय कार्यक्रम भी आयोजित किया था।भाजपा नेताओं का तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद सबसे महत्वपूर्ण चर्चा का मंच है। वहीं, राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौती ने सरकार की जवाबदेही और विपक्ष की भूमिका पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस चुनौती पर भाजपा के ताजा पलटवार का क्या जवाब देती है।फिलहाल राहुल गांधी की प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीधी बहस की मांग और भाजपा की संसद में चर्चा करने की चुनौती के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। इस विवाद का अगला चरण संसद में चर्चा की संभावनाओं और विपक्ष की आगामी रणनीति पर निर्भर करेगा।