New दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के नए नियुक्त राज्य प्रभारियों और सह-प्रभारियों को संगठन मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में हुई बैठक में उन्होंने नेताओं से कहा कि वे बार-बार दिल्ली आने के बजाय उन्हें सौंपे गए राज्यों में अधिक समय बिताएं और स्थानीय संगठन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें। पार्टी ने हाल ही में विभिन्न राज्यों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं।
बैठक की अध्यक्षता BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने की। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी मौजूद रहे। बैठक में अलग-अलग राज्यों से आए प्रभारी और सह-प्रभारियों ने हिस्सा लिया। हाल में संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद राज्य प्रभारियों और सह-प्रभारियों की यह पहली प्रमुख बैठक थी।
बैठक में पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया गया। नितिन नवीन ने प्रभारियों से कहा कि उन्हें जिन राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है, वहां नियमित दौरे करें और प्रदेश नेतृत्व, जिला संगठन तथा कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद स्थापित करें। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि केंद्रीय पदाधिकारी केवल रिपोर्ट और बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति को समझें।
नितिन नवीन ने नेताओं को बार-बार दिल्ली आने से बचने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी संबंधित प्रदेशों में पर्याप्त समय देकर संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करें। स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं और कार्यकर्ताओं की चिंताओं को समझकर उनका समाधान निकालने में भूमिका निभाएं।
बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, राज्य इकाइयों के कामकाज और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हुई। नए प्रभारियों से अपने-अपने राज्यों में संगठन के विभिन्न स्तरों के साथ समन्वय बढ़ाने को कहा गया। इसमें प्रदेश पदाधिकारियों से लेकर जिला, मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक संवाद मजबूत करने पर जोर रहा।
BJP ने कुछ दिन पहले ही संगठनात्मक स्तर पर व्यापक बदलाव करते हुए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। संगठनात्मक फेरबदल के तहत कुल 36 प्रभारी और सह-प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या नई नियुक्तियां की गईं। इनमें कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
इस फेरबदल के तहत उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है और उनके साथ चार सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। वहीं स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी मिली है। राम माधव को उत्तराखंड और तमिलनाडु, जबकि सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों को देखते हुए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां दी हैं।
बैठक में यह भी संकेत दिया गया कि प्रभारियों की भूमिका केवल चुनाव के समय सक्रिय होने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें पूरे साल संगठन के साथ जुड़े रहना होगा। राज्य संगठन की बैठकों में शामिल होने, कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी उन्हें निभानी होगी।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि केंद्रीय और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय बना रहे। राज्य प्रभारी इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। उन्हें प्रदेश इकाई से मिलने वाली जानकारी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने के साथ-साथ राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति और दिशा-निर्देशों को राज्य स्तर पर लागू कराने की जिम्मेदारी भी दी जाती है।
बीएल संतोष की मौजूदगी में हुई बैठक में संगठनात्मक अनुशासन और नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया गया। अलग-अलग राज्यों में पार्टी की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर समय-समय पर रिपोर्ट लेने की व्यवस्था पर चर्चा हुई।
हालिया संगठनात्मक बदलाव को आगामी चुनावों और राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी आने वाले समय में कई राज्यों में स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों का सामना करेगी। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व की कोशिश है कि राज्य इकाइयां पहले से सक्रिय रहें और संगठन बूथ स्तर तक मजबूत हो।
नितिन नवीन ने प्रभारियों और सह-प्रभारियों को यह संदेश भी दिया कि संगठन मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संपर्क जरूरी है। केवल बड़े नेताओं के साथ बैठकें करने के बजाय स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बात सुनने पर भी जोर दिया गया।
मंगलवार की बैठक के बाद अब नए प्रभारी और सह-प्रभारी अपने-अपने राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करेंगे। पार्टी नेतृत्व आने वाले दिनों में इनके कामकाज और राज्य इकाइयों के साथ समन्वय की नियमित समीक्षा भी कर सकता है।
कुल मिलाकर BJP नेतृत्व ने नई टीम को स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य प्रभारी की जिम्मेदारी केवल दिल्ली में बैठकों तक सीमित नहीं है। उन्हें संबंधित राज्यों में ज्यादा समय देकर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा और स्थानीय नेतृत्व तथा कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना होगा।
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