नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पसमांदा मुस्लिम समाज की छोटी जातियों और वंचित तबकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति तेज कर दी है। पार्टी ने इसके लिए देशभर के मुस्लिम नेताओं को जोड़कर फेडरेशन आधारित एक संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है। इस पहल के जरिए पसमांदा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

भाजपा लंबे समय से पसमांदा मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुस्लिम समाज के भीतर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की समस्याओं को समझते हुए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मुस्लिम नेताओं का बनाया गया फेडरेशन संगठन

पसमांदा समाज तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा से जुड़े मुस्लिम नेताओं का एक फेडरेशन आधारित संगठन तैयार किया गया है। इस संगठन में देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े मुस्लिम नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसका उद्देश्य पसमांदा समाज के विभिन्न समूहों के साथ संवाद स्थापित करना और उनकी सामाजिक, आर्थिक तथा शैक्षणिक समस्याओं को सामने लाना बताया जा रहा है।

संगठन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर बैठकों, संपर्क अभियानों और समाज के लोगों के साथ संवाद कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजना है। पार्टी की कोशिश है कि छोटे मुस्लिम समुदायों और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत की जाए।

उत्तराखंड से शादाब शम्स को मिली जिम्मेदारी

उत्तराखंड से वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स को संगठन में पार्लियामेंट्री बोर्ड सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है। शादाब शम्स राज्य में भाजपा से जुड़े प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं। उन्हें मिली जिम्मेदारी के जरिए पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर पसमांदा समाज से जुड़े मुद्दों को उठाने की भूमिका दे रही है।

वहीं उत्तराखंड से हाजी इरशाद को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। उनके नेतृत्व में राज्य स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। पार्टी की योजना है कि प्रदेशों में स्थानीय मुस्लिम नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़कर संगठन का विस्तार किया जाए।

पसमांदा समाज पर भाजपा की राजनीतिक रणनीति

पसमांदा मुस्लिम समाज भारत में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है, जिसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग शामिल हैं। भाजपा पिछले कुछ समय से इन वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए और किसी भी समुदाय के पिछड़े वर्गों को पीछे नहीं रहना चाहिए। इसी सोच के तहत पसमांदा समाज के बीच संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं।

भाजपा की इस रणनीति को मुस्लिम समाज के भीतर अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का जोर धार्मिक पहचान के बजाय सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के आधार पर संवाद स्थापित करने पर है।

संगठन विस्तार पर रहेगा जोर

फेडरेशन आधारित संगठन के जरिए भाजपा आने वाले समय में देश के अलग-अलग राज्यों में अपनी गतिविधियों को बढ़ा सकती है। इसमें स्थानीय स्तर के नेताओं, सामाजिक प्रतिनिधियों और समुदाय से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है।

संगठन के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे पसमांदा समाज से जुड़े मुद्दों को समझें और उन्हें पार्टी के मंच तक पहुंचाएं। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी भी समाज के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न समुदायों के सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाना राजनीतिक दलों की सामान्य संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा रहा है। भाजपा भी पसमांदा समाज को अपने साथ जोड़ने के लिए इसी दिशा में काम कर रही है।

आगामी चुनावों को देखते हुए बढ़ी सक्रियता

पसमांदा समाज को लेकर भाजपा की सक्रियता को आने वाले चुनावी समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे सामाजिक जुड़ाव और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की पहल बताया जा रहा है।

फेडरेशन संगठन के गठन और विभिन्न राज्यों के नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह संगठन जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी तरीके से काम करता है और पसमांदा समाज के बीच किस तरह का संवाद स्थापित कर पाता है।

Tags: