नई दिल्ली। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने रविवार को देश की प्रगति और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति उसके संस्थानों की मजबूती पर निर्भर करती है। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि गरीब, जरूरतमंद और समाज के वंचित वर्गों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मजबूत संस्थान किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आधारशिला होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक और निजी, दोनों प्रकार के संस्थान देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। हालांकि, जनकल्याण से जुड़े संस्थानों को मजबूत करना विशेष रूप से आवश्यक है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थानों का सशक्त होना जरूरी
पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थानों का महत्व केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन को प्रभावित करते हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी समाज में, विशेषकर लोकतंत्र में, संस्थानों का होना अत्यंत आवश्यक है। चाहे वे सार्वजनिक क्षेत्र के हों या निजी क्षेत्र के, देश की प्रगति और नागरिकों के कल्याण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।चंद्रचूड़ ने इस बात पर जोर दिया कि केवल नए संस्थानों की स्थापना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद संस्थानों की कार्यक्षमता, गुणवत्ता और विश्वसनीयता को भी लगातार बेहतर बनाना चाहिए।
गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए सहारा हैं सरकारी अस्पताल
स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सरकारी अस्पताल देश के लाखों गरीब और जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं।उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोग बेहतर और किफायती उपचार की उम्मीद लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों से सरकारी अस्पतालों तक पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की जरूरतों को समझना और उनके उपचार तथा कल्याण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए वहन करना कठिन हो सकता है।
मरीजों की देखभाल और कल्याण को मिले प्राथमिकता
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने स्वास्थ्य संस्थानों की मजबूती के साथ-साथ मरीजों की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में केवल बुनियादी ढांचे का विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके समग्र कल्याण पर भी ध्यान देना जरूरी है।उनकी टिप्पणियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि अस्पतालों की सफलता का आकलन केवल उनके आकार या उपलब्ध संसाधनों से नहीं, बल्कि मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता से भी किया जाना चाहिए।स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, आवश्यक उपकरण और प्रभावी प्रबंधन जैसे पहलू महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
दूरदराज से इलाज के लिए पहुंचते हैं मरीज
चंद्रचूड़ ने सरकारी अस्पतालों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक मरीज इलाज कराने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं।ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बड़े सरकारी अस्पताल कई बार विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करने का प्रमुख विकल्प होते हैं।ऐसे में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता बढ़ाना और उनकी सेवाओं को बेहतर बनाना महत्वपूर्ण है। इससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।उनकी टिप्पणियों से यह भी स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का मुद्दा केवल चिकित्सा सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता और जनकल्याण से भी जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रीय प्रगति में सार्वजनिक संस्थानों की अहम भूमिका
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने संस्थागत मजबूती और राष्ट्रीय विकास के बीच गहरे संबंध की ओर ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए मौजूदा संस्थानों को अधिक सक्षम और सुदृढ़ बनाना जरूरी है। मजबूत संस्थान नागरिकों का विश्वास बढ़ाने और जनकल्याणकारी सेवाओं को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।विशेष रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने से समाज के उन वर्गों को लाभ मिल सकता है, जिनके पास उपचार के सीमित विकल्प उपलब्ध हैं।पूर्व CJI चंद्रचूड़ का यह संदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों के अधिकारों और संस्थागत जिम्मेदारियों के महत्व को रेखांकित करता है।उन्होंने जोर दिया कि देश के विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए, ताकि गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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