नई दिल्ली। INDIA गठबंधन की बुधवार को नई दिल्ली में हुई कोऑर्डिनेशन मीटिंग के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त आंदोलन की घोषणा की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद कहा कि विपक्षी दल आगे भी तालमेल के साथ काम करेंगे और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को संयुक्त रूप से उठाएंगे।
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खड़गे ने बताया कि करीब साढ़े तीन घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में अलग-अलग दलों के नेताओं ने अपनी राय रखी और आगे की रणनीति पर विचार किया गया। खड़गे के मुताबिक सभी दलों ने मिलकर आंदोलन चलाने और मुद्दों पर एकजुट रहने पर सहमति जताई।
उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं ने बैठक में अपने विचार साझा किए। खड़गे ने कहा कि सभी दलों की राय सुनने के बाद फैसला किया गया कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से आवाज उठाई जाएगी। बैठक में करीब 20 विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है।
बैठक में मुख्य रूप से चुनाव आयोग, मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के मुद्दों पर चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। हालांकि चुनाव आयोग इन आरोपों से असहमति जताता रहा है और उसका कहना है कि SIR से जुड़े फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि महत्वपूर्ण फैसले आयोग में सर्वसम्मति से लिए गए और प्रक्रिया की समीक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं।
INDIA गठबंधन ने बैठक के बाद चरणबद्ध विरोध कार्यक्रम की घोषणा की। इसके तहत 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देश के विभिन्न जिलों में 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' आयोजित करने की योजना है। खड़गे ने कहा कि इन कार्यक्रमों में गठबंधन के दलों के साथ नागरिक संगठनों और समान विचार रखने वाले लोगों को भी शामिल किया जाएगा। जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष अपनी मांगें जनता के सामने रखेगा।
इसके अलावा 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों की ओर से दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने की घोषणा की गई है। खड़गे ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के सांसद इस कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। विपक्षी दल इस दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवाल आयोग के सामने रखेंगे।
बैठक में 1 नवंबर को नई दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित करने का फैसला भी किया गया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त अभियान का हिस्सा बताया है। खड़गे ने कहा कि अलग-अलग स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर जनता तक विपक्ष की बात पहुंचाई जाएगी।
खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी आयोग को प्रभावित करने का आरोप लगाया। ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग ने इससे पहले अपनी प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि मतदाता सूची संशोधन और SIR से जुड़े कदम कानून और स्थापित प्रक्रिया के अनुसार उठाए गए हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेदों से जुड़े सवालों पर कहा था कि अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
बैठक में विपक्ष की ओर से चुनाव व्यवस्था से संबंधित कई मांगें भी सामने रखी गईं। इनमें मतदाता सूची में बदलाव की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने, किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उचित सूचना और अपील का मौका देने तथा मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है। खड़गे ने भविष्य के चुनावों में SIR से पहले की मतदाता सूची के इस्तेमाल की मांग भी रखी। इसके अलावा कुछ विपक्षी नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि किसी योग्य मतदाता का नाम प्रशासनिक गलती, दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव के कारण मतदाता सूची से बाहर न हो। उन्होंने चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही और राजनीतिक दलों के बीच भरोसा कायम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। ये INDIA गठबंधन की मांगें हैं और इन पर चुनाव आयोग या सरकार की सहमति नहीं मानी जा सकती।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और विभिन्न विपक्षी दलों के नेता तथा प्रतिनिधि शामिल हुए। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी, सीपीआई, सीपीआई (एम), जेएमएम और अन्य दलों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए और पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए प्रक्रिया चलाई गई और पात्र मतदाताओं को आवश्यक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं।
INDIA गठबंधन की बुधवार की बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि विपक्ष आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर लगातार उठाने की तैयारी में है। 2 से 8 अक्टूबर के जिला स्तरीय प्रदर्शन, 6 अक्टूबर का चुनाव आयोग मार्च और 1 नवंबर की प्रस्तावित दिल्ली रैली इस संयुक्त अभियान के प्रमुख कार्यक्रम होंगे। विपक्ष ने इन्हें चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही की मांग से जोड़ा है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताता रहा है।