Australian रक्षा मंत्री दूसरे रक्षा मंत्रियों के संवाद के लिए आएंगे भारत
Canberra : ऑस्ट्रेलियाई उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, रिचर्ड मार्लेस भारत की यात्रा करेंगे, जहाँ वे दूसरे ऑस्ट्रेलिया-भारत रक्षा मंत्रियों के संवाद के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे। यह बात ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कही गई है।
पिछले अक्टूबर में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में आयोजित हुई यह बैठक, द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी में अभूतपूर्व प्रगति और सहयोग बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। बयान के अनुसार, भारत यात्रा से पहले, मार्लेस इस सप्ताह सिंगापुर जाएंगे, जहाँ वे 23वें शांगरी-ला संवाद में शामिल होंगे।इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ द्वारा आयोजित, वार्षिक शांगरी-ला संवाद इस क्षेत्र का सबसे प्रमुख रक्षा और सुरक्षा मंच है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया भर के नेताओं को एक साथ लाता है, ताकि वे साझा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों और उनके समाधानों पर चर्चा कर सकें।
संवाद के दौरान, उप प्रधानमंत्री 'एशिया की समुद्री सुरक्षा अव्यवस्था' विषय पर तीसरे पूर्ण सत्र में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर अपना संबोधन देंगे। बयान में यह भी कहा गया है कि वे वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर अपने कई रक्षा समकक्षों से भी मुलाकात करेंगे। मार्लेस ने कहा, "हम सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, अपने कूटनीतिक और रक्षा संबंधों को और गहरा करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"
बयान में उनके हवाले से कहा गया है, "ऑस्ट्रेलिया और भारत शीर्ष-स्तरीय सुरक्षा साझेदार हैं। मैं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के लिए उत्सुक हूँ, ताकि पिछले वर्ष उनकी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान हमने जो ठोस प्रगति की थी, उसके आधार पर हम अपनी रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत बना सकें।"
इससे पहले, 9 अक्टूबर 2025 को, मार्लेस ने पहले ऑस्ट्रेलिया-भारत रक्षा मंत्रियों के संवाद के लिए ऑस्ट्रेलिया आने पर राजनाथ सिंह का स्वागत किया था। यह संवाद द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी में हुई अभूतपूर्व प्रगति और दोनों मंत्रियों की सहयोग बढ़ाने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता था; यह प्रगति 2020 में ऑस्ट्रेलिया-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को उच्च स्तर पर ले जाने के बाद से दोनों मंत्रियों के बीच हुई चार द्विपक्षीय बैठकों का ही परिणाम थी।
बयान में कहा गया है कि दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने प्रधानमंत्रियों के उस दीर्घकालिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सहयोग के माध्यम से सामूहिक शक्ति को बढ़ाया जा सके, दोनों देशों की सुरक्षा में योगदान दिया जा सके, और साथ ही क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सके।