नई दिल्ली। म्यांमार ट्रेनिंग कैंप से जुड़े राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों की अर्जियों पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल NIA अदालत में कानूनी कार्यवाही जारी है। मंगलवार को स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा की अदालत ने संबंधित अर्जियों पर आगे की सुनवाई के लिए मामला बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया। वैनडाइक ने अपने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति मांगी है, जबकि छह यूक्रेनी नागरिक मामले से रिहाई की मांग कर रहे हैं।यह मामला मार्च 2026 में NIA द्वारा सात विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ये लोग म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को कथित रूप से हथियार और ड्रोन संचालन से जुड़ी ट्रेनिंग देने जैसी गतिविधियों में शामिल थे। आरोपियों ने इन आरोपों का विरोध किया है और मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है।
वैनडाइक ने मांगी अमेरिका जाने की अनुमति
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक ने दिल्ली की अदालत में अर्जी दाखिल कर अपने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति मांगी है। वैनडाइक को 18 सितंबर को इसी मामले में डिफॉल्ट बेल मिल चुकी है।उसने एक अलग आवेदन में अदालत से एक लाख रुपये के जमानती बॉन्ड की जगह कैश बॉन्ड जमा करने की अनुमति भी मांगी है। उसके वकीलों ने अदालत के सामने कहा है कि वह जमानत की शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है।वैनडाइक के वकील रोहित दांदरियाल और रोहित गौर ने उसकी तरफ से अर्जियां दाखिल की हैं। कोर्ट को Foreigners Regional Registration Office यानी FRRO की रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में मिली है।
18 सितंबर को मिली थी डिफॉल्ट बेल
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 18 सितंबर को वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दी थी। अदालत ने उसे एक लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की एक जमानत देने का निर्देश दिया था।अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि NIA की ओर से दाखिल चार्जशीट केवल Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 21 और 23 से संबंधित थी। UAPA के तहत दर्ज कथित अपराधों की जांच जारी थी। कोर्ट ने चार्जशीट को इस संदर्भ में अधूरा माना और कहा कि जांच एजेंसी अधूरी चार्जशीट दाखिल करके आरोपी के डिफॉल्ट बेल के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती।वैनडाइक को मार्च में गिरफ्तार किया गया था और UAPA मामलों में लागू 180 दिनों की वैधानिक अवधि सितंबर में पूरी हो गई थी।
छह यूक्रेनी नागरिक भी हैं आरोपी
इस मामले में वैनडाइक के अलावा छह यूक्रेनी नागरिक भी गिरफ्तार किए गए थे। इनकी पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफानकिव, मक्सिम होन्चारुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है।इन यूक्रेनी नागरिकों की तरफ से भी अदालत में राहत की मांग की गई है। उनका पक्ष है कि NIA द्वारा दाखिल चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गई हैं और Immigration and Foreigners Act से संबंधित अपराधों का कंपाउंडिंग के जरिए निपटारा हो चुका है। इसी आधार पर वे मामले से रिहाई की मांग कर रहे हैं।वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल देते समय अदालत ने यह भी कहा था कि अन्य सह-आरोपी समान कानूनी आधार पर डिफॉल्ट बेल के हकदार हो सकते हैं।
चार्जशीट में नहीं लगाई गई UAPA की धाराएं
NIA ने 8 सितंबर को सातों विदेशी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें UAPA की धाराएं शामिल नहीं थीं। चार्जशीट में Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि UAPA से जुड़ी जांच पूरी तरह समाप्त हो गई है। NIA ने अदालत को बताया है कि कथित आतंकवाद से जुड़े पहलुओं की आगे की जांच जारी है और सबूत सामने आने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।यही कानूनी स्थिति आरोपियों की अर्जियों का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।
इमिग्रेशन उल्लंघनों का हुआ कंपाउंडिंग
Immigration and Foreigners Act से जुड़े अपराधों के मामले में कंपाउंडिंग की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। मंगलवार को वैनडाइक ने इमिग्रेशन कानून के कथित उल्लंघनों को कंपाउंड कराने के लिए FRRO के समक्ष 5.5 लाख रुपये जमा किए। उसके कानूनी पक्ष ने संकेत दिया है कि अब स्पेशल NIA कोर्ट में डिस्चार्ज की अर्जी भी दाखिल की जा सकती है।कंपाउंडिंग सामान्य रूप से ऐसी कानूनी प्रक्रिया है जिसमें निर्धारित शर्तों और राशि के भुगतान के बाद कंपाउंड किए जा सकने वाले अपराधों का निपटारा किया जाता है। हालांकि इसका दूसरे आरोपों या जारी जांच पर क्या प्रभाव होगा, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
मार्च में हुई थी सात विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी
NIA ने वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था। वैनडाइक को 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था, जबकि छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ के हवाई अड्डों से पकड़ा गया।NIA की FIR में आरोप लगाया गया था कि आरोपी मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में गए, वहां से कथित रूप से अवैध तरीके से म्यांमार पहुंचे और जातीय सशस्त्र संगठनों के संपर्क में आए। एजेंसी ने हथियार और ड्रोन संचालन से संबंधित प्रशिक्षण देने के आरोप भी लगाए थे। ये NIA के आरोप हैं और इनका अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी नहीं हुआ है।
परिवार से मिलने के लिए पहले भी मांगी थी सुविधा
हिरासत के दौरान वैनडाइक ने अपने परिवार से संपर्क के लिए अदालत का रुख किया था। मई में उसने अमेरिका में रह रहे परिवार के सदस्यों से वीडियो कॉल या ई-मुलाकात की अनुमति मांगी थी। इसके साथ उसने चिकित्सा उपचार से संबंधित आवेदन भी दिया था। अदालत ने उस समय जेल प्रशासन और NIA से जवाब मांगा था।अब डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद उसने सीधे अमेरिका जाकर परिवार से मिलने की अनुमति मांगी है। हालांकि बेल आदेश के तहत उसे दिल्ली में रहने और जांच अधिकारी के बुलाने पर पेश होने की शर्त दी गई थी। ऐसे में विदेश यात्रा की अनुमति देने या नहीं देने का फैसला अदालत करेगी।
UAPA जांच अभी जारी
मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहली चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं हैं, लेकिन NIA ने आतंकवाद से जुड़े कथित पहलुओं की जांच बंद करने की घोषणा नहीं की है। एजेंसी के अनुसार इस हिस्से में आगे की जांच जारी है।इसी कारण आरोपियों की तरफ से एक ओर चार्जशीट में UAPA नहीं होने को राहत का आधार बनाया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर जांच एजेंसी का कहना है कि संबंधित जांच अभी पूरी नहीं हुई है।अब अदालत के सामने वैनडाइक की विदेश यात्रा और कैश बॉन्ड संबंधी मांग के साथ छह यूक्रेनी नागरिकों की राहत से जुड़ी अर्जियां हैं। अगली सुनवाई में इन आवेदनों पर अदालत का रुख इस मामले की आगे की कानूनी दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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