नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिसकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी और हिंसक व्यवहार को लेकर दिल्ली पुलिस ने चिंता जताई है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की डीसीपी सृष्टि पांडे ने कहा कि कुछ गलत प्रभाव युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं से अपने व्यवहार, भविष्य और कानूनी परिणामों के बारे में गंभीरता से विचार करने की अपील की। डीसीपी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट या अभद्र व्यवहार करना समाज में अच्छा संदेश नहीं देता है।डीसीपी सृष्टि पांडे ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी वर्दीधारी अधिकारियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
डीसीपी सृष्टि पांडे ने कहा, "यह साफ है कि कोई गलत असर युवा पीढ़ी को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहा है। अपनी कानूनी ड्यूटी निभा रहे वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी करना, उन पर हाथ उठाना, मारने, काटने या खरोंचने की कोशिश करना समाज में अच्छा संदेश नहीं देता है।उन्होंने युवाओं से अपील की कि किसी भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते समय वे अपने आचरण और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारियों को समझें। डीसीपी ने कहा कि वर्तमान में किया गया कोई भी गैरकानूनी कार्य भविष्य में गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। इसलिए युवाओं को ऐसे किसी भी व्यवहार से बचना चाहिए, जिससे उनके भविष्य और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़े।
दरअसल, राजधानी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।हालांकि, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी तथा राजनीतिक पक्षपात के आरोपों का खंडन किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी है। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और उनके सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाई। इन घटनाओं को लेकर पुलिस ने अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की है।दिल्ली पुलिस के अनुसार, हाल के प्रदर्शनों के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों की जांच के लिए घटनास्थल से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रसारित रिकॉर्डिंग की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य कथित घटनाओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान करना है।
इस बीच 7 अक्टूबर को आयोजित विपक्षी प्रदर्शन के संबंध में भी पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। पुलिस की ओर से इन घटनाओं को गंभीर बताया गया है। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को अदालत में प्रमाणित होना बाकी है।दिल्ली में विरोध प्रदर्शन केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी गई है।
महिला पत्रकारों की शिकायतों के बाद पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि घटनाओं से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के कुछ आरोपों को खारिज किया है।ऐसे में राजधानी में विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है। जहां पुलिसकर्मी अपनी सुरक्षा और सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
इसी बीच दिल्ली की एक अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन से संबंधित मामले में गिरफ्तार 17 प्रदर्शनकारियों को जमानत दी थी। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपियों की उम्र और उनके भविष्य से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है, लेकिन अदालत ने संबंधित परिस्थितियों के आधार पर उन्हें राहत प्रदान की।डीसीपी सृष्टि पांडे का ताजा बयान ऐसे समय में आया है, जब राजधानी में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा या पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी को सामान्य व्यवहार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। हालांकि, इस अधिकार के प्रयोग के दौरान कानून व्यवस्था और दूसरे व्यक्तियों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। इसी तरह प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से भी कानून के अनुसार संयम और निष्पक्ष व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।सृष्टि पांडे ने युवाओं से अपने निर्णयों के दीर्घकालिक प्रभाव को समझने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसक व्यवहार से समाज में गलत संदेश जाता है।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में राजनीतिक विरोध जारी है। पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कथित हिंसक घटनाओं की जांच में जुटा है। वहीं, विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं।दिल्ली पुलिस की डीसीपी सृष्टि पांडे के बयान ने विरोध प्रदर्शनों में युवाओं की भूमिका, पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। इस बीच संबंधित घटनाओं की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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