नई दिल्ली। ऑनलाइन बाइक टैक्सी और कैब सेवा देने वाली कंपनी रैपिडो से जुड़े ड्राइवर अंकित को कथित तौर पर प्लेटफॉर्म से हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। बहुजन समाज पार्टी के नेता आकाश आनंद ने इस मामले को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से सवाल किया है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दलितों के सम्मान और उनके साथ होने वाले कथित भेदभाव से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
आकाश आनंद ने सोशल मीडिया के जरिए मामले को उठाते हुए कैब ड्राइवर अंकित के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि रोजगार के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले किसी व्यक्ति को उसके सामाजिक विचारों या पहचान के कारण निशाना बनाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने रैपिडो की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कंपनी को पूरे मामले में पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अंकित को हटाने का मामला बना चर्चा का विषय
कैब ड्राइवर अंकित से जुड़ा मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से चर्चा में आया। अंकित के कथित वीडियो और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इसी बीच रैपिडो की ओर से अंकित के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आने के बाद मामला और गरमा गया।
आकाश आनंद ने इस कार्रवाई को लेकर कहा कि किसी कर्मचारी या ड्राइवर की आजीविका से जुड़ा फैसला बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे मामलों में किसी भी कंपनी को तथ्यों की पूरी जांच करने और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने इस मामले को केवल एक ड्राइवर की नौकरी तक सीमित न रखते हुए सामाजिक सम्मान और बराबरी के सवाल से जोड़ दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।
मोहन भागवत से आकाश आनंद ने पूछा सवाल
आकाश आनंद ने अपनी प्रतिक्रिया में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जिक्र करते हुए दलित समाज से जुड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि समाज में समानता और सामाजिक समरसता की बात की जाती है तो दलित समुदाय से आने वाले लोगों के सम्मान और रोजगार से जुड़े मामलों में क्या रुख अपनाया जाना चाहिए।
उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में तब्दील होता दिखाई दिया। आकाश आनंद लंबे समय से दलित युवाओं, सामाजिक न्याय और आरक्षण जैसे मुद्दों पर मुखर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने दलित समाज के सम्मान का मुद्दा उठाते हुए इसे व्यापक सामाजिक सवाल के रूप में पेश किया।
आकाश आनंद का सवाल सीधे तौर पर इस बात पर केंद्रित रहा कि सामाजिक समरसता की बात करने वाले संगठनों और नेताओं को ऐसी घटनाओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
 सोशल मीडिया पर दो पक्षों में बंटी बहस
अंकित से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स रैपिडो की कथित कार्रवाई को सही ठहराते हुए कंपनियों के नियमों और आचार संहिता की बात कर रहे हैं। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आकाश आनंद की प्रतिक्रिया के बाद बहस में जाति और सामाजिक भेदभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल हो गया। उनके समर्थकों का कहना है कि निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों और गिग वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम होने चाहिए।
दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर कई लोग इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं देने की बात भी कह रहे हैं। उनका कहना है कि कंपनी और ड्राइवर के बीच हुए घटनाक्रम के सभी तथ्य सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।
 गिग वर्कर्स के अधिकारों का सवाल भी उठा
इस पूरे विवाद ने ऐप आधारित कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स के अधिकारों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। देश के बड़े शहरों में लाखों लोग कैब, बाइक टैक्सी और फूड डिलीवरी जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
ऐसे कर्मचारियों को आमतौर पर नियमित कर्मचारी के बजाय पार्टनर या गिग वर्कर के रूप में प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाता है। ऐसे में अकाउंट बंद होने या प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की स्थिति में उनकी आय अचानक प्रभावित हो सकती है।
अंकित से जुड़े विवाद के बाद सोशल मीडिया पर यह मांग भी उठी कि किसी ड्राइवर का अकाउंट बंद करने से पहले कंपनियों को स्पष्ट कारण बताना चाहिए। साथ ही ड्राइवर को कंपनी के फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए।
दलित सम्मान के मुद्दे पर आक्रामक दिखे आकाश आनंद
आकाश आनंद ने पूरे मामले को दलित सम्मान से जोड़कर अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। बसपा की राजनीति लंबे समय से दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के अधिकारों के मुद्दे पर केंद्रित रही है। ऐसे में अंकित से जुड़े घटनाक्रम को लेकर आकाश आनंद की प्रतिक्रिया को इसी राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि रोजगार के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। संविधान सभी नागरिकों को समानता और सम्मान का अधिकार देता है और किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर भेदभाव होने के आरोप बेहद गंभीर हैं।
हालांकि अंकित के खिलाफ हुई कार्रवाई के वास्तविक कारण और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक तथ्यों का स्पष्ट होना जरूरी है। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित किए बिना अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
रैपिडो से जवाब की मांग
इस मामले के राजनीतिक रूप लेने के बाद रैपिडो से भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है। सवाल किया जा रहा है कि अंकित को प्लेटफॉर्म से हटाने का वास्तविक कारण क्या था और कंपनी ने कार्रवाई से पहले किन तथ्यों की जांच की थी।
कंपनी की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई कंपनी की आंतरिक नीतियों के उल्लंघन से संबंधित थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
आकाश आनंद की प्रतिक्रिया के कारण यह मामला अब केवल एक कैब ड्राइवर और कंपनी के बीच का विवाद नहीं रह गया है। इसमें दलित सम्मान, सामाजिक समानता और गिग वर्कर्स के अधिकार जैसे कई बड़े मुद्दे जुड़ गए हैं।
 सियासी बयानबाजी बढ़ने की संभावना
आकाश आनंद द्वारा मोहन भागवत से सीधे सवाल किए जाने के बाद इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बढ़ सकती हैं। बसपा इस मुद्दे को दलितों के सम्मान और रोजगार से जोड़कर आगे उठा सकती है। वहीं अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल अंकित से जुड़े पूरे मामले के तथ्यों और रैपिडो की आधिकारिक स्थिति का स्पष्ट होना सबसे महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद आकाश आनंद की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि कंपनी इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देती है और मोहन भागवत या आरएसएस की ओर से आकाश आनंद के सवाल पर कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
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