नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में बुधवार को हुई भयावह घटना के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचने का मौका दिया, जिसके बाद हमलावर को काबू किया जा सका। विमान में 174 यात्री सवार थे।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक और नाम सामने आया है। जब कैप्टन स्मित खुद खून से लथपथ और गंभीर रूप से घायल थे, तब विमान में सवार इजरायली डेंटिस्ट डॉ. शोटा मुसायेव उनके लिए मददगार बने। उन्होंने कैप्टन को प्राथमिक उपचार दिया और उनके शरीर से हो रहे रक्तस्राव को रोकने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक कई यात्रियों ने उनकी मदद की, लेकिन मुसायेव ने घायल कैप्टन की देखभाल में अहम भूमिका निभाई।
फ्लाईदुबई की FZ1073 उड़ान दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित पर कथित तौर पर को-पायलट ने हमला कर दिया। हमले में स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्य अंदर पहुंचे और आरोपी को काबू किया गया।
घटना के दौरान विमान तेजी से नीचे आने लगा था, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई। बाद में विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। सभी यात्री सुरक्षित रहे।
कॉकपिट खुलने के बाद जब यात्रियों ने कैप्टन स्मित को देखा तो उनकी हालत गंभीर थी। वह बुरी तरह घायल थे और काफी खून बह चुका था। ऐसे समय में डॉ. शोटा मुसायेव आगे आए। उन्होंने उपलब्ध साधनों की मदद से कैप्टन के घावों पर दबाव बनाकर रक्तस्राव रोकने की कोशिश की।
डॉ. मुसायेव ने बाद में बताया कि कैप्टन के सिर और हाथों से काफी खून बह रहा था। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत कुछ समय के लिए स्थिर हुई, हालांकि लैंडिंग के आसपास उनकी स्थिति फिर बिगड़ने लगी थी।
यानी जिस कैप्टन ने अपनी जान जोखिम में डालकर 174 लोगों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसी कैप्टन की जिंदगी बचाने के लिए विमान के यात्रियों ने भी पूरी ताकत लगा दी। यही वजह है कि अब इस घटना में कैप्टन स्मित के साथ उन यात्रियों की भी चर्चा हो रही है जिन्होंने संकट की घड़ी में हिम्मत दिखाई।
विमान के सुरक्षित उतरते ही कैप्टन स्मित को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। भारतीय दूतावास के मुताबिक उन्हें तबुक के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें जरूरी चिकित्सा सहायता दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
उनकी सर्जरी भी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गंभीर चोटों के बावजूद डॉक्टरों की निगरानी में उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
कैप्टन स्मित मच्छार मूल रूप से भारतीय हैं और लंबे समय से विमानन क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके पास हजारों घंटे का उड़ान अनुभव है। उन्होंने पहले भारत में भी एयरलाइन सेवा में काम किया और बाद में फ्लाईदुबई से जुड़े। घटना के बाद उनकी सूझबूझ और साहस की तारीफ भारत के साथ-साथ विदेशों में भी हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित की बहादुरी की प्रशंसा की है। नेतन्याहू ने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों और क्रू को हमलावर तक पहुंचने का मौका दिया, जिससे बड़ी त्रासदी टल गई।
वहीं विमान में मदद करने वाले यात्रियों की भी अब पहचान सामने आ रही है। इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने यानिव हायून, डॉ. शोटा मुसायेव, त्ज़विका मंस और असफ रेजवान से बात की, जिन्होंने विमान में संकट के दौरान मदद की थी। इन लोगों को नागरिक वीरता सम्मान के लिए अनुशंसित किए जाने की बात भी सामने आई है।
इस पूरी घटना में सबसे अहम बात यह रही कि विमान के अंदर मौजूद कई लोगों ने अलग-अलग भूमिका निभाकर एक बड़े हादसे को टालने में मदद की। कैप्टन स्मित ने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का रास्ता खोला, यात्रियों और क्रू ने हमलावर को नियंत्रित किया, ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान संभाला और डॉ. मुसायेव समेत अन्य यात्रियों ने घायल कैप्टन को प्राथमिक उपचार दिया।
फ्लाइट के सुरक्षित उतरने के बाद आरोपी को सऊदी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। घटना के पीछे की वजह को लेकर जांच चल रही है और अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
कैप्टन स्मित मच्छार इस समय चिकित्सा देखरेख में हैं। उनके परिवार और भारतीय अधिकारियों को उनकी स्थिति की जानकारी दी जा रही है। उनकी बहादुरी ने जहां विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई, वहीं डॉ. शोटा मुसायेव और अन्य यात्रियों की तत्परता ने घायल कैप्टन को समय पर प्राथमिक उपचार दिलाया।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि संकट की स्थिति में कुछ मिनटों के फैसले कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कॉकपिट में हुई हिंसा के बीच कैप्टन स्मित ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और उसके तुरंत बाद यात्रियों ने भी इंसानियत दिखाते हुए उनकी जान बचाने के लिए पूरी कोशिश की।
फिलहाल कैप्टन स्मित का इलाज जारी है और दुनियाभर से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। विमान में सवार यात्रियों के लिए वे संकट की घड़ी में रक्षक बने, तो घायल होने के बाद डॉ. शोटा मुसायेव और अन्य मददगार उनके लिए सहारा बनकर सामने आए।