नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रसंघ के निर्वाचित पदाधिकारियों के निष्कासन को रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार, 19 अक्टूबर को बड़ा बयान जारी किया। प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ अब तक दो दौर की बातचीत हो चुकी है। विश्वविद्यालय की ओर से भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्र भी शामिल हैं। हालांकि, बातचीत के बावजूद छात्रों की प्रमुख मांगों पर अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है।जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के पदाधिकारी और अन्य विद्यार्थी 3 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। सोमवार को उनका आंदोलन 16वें दिन में प्रवेश कर गया। छात्रों का कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
9 और 14 अक्टूबर को हुई थी बातचीत
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा गठित समिति ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए दो बैठकें आयोजित की थीं।पहली बैठक 9 अक्टूबर और दूसरी 14 अक्टूबर को हुई थी। इन बैठकों में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की मांगों और विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।प्रशासन के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान तलाशना था।हालांकि, छात्रसंघ का कहना है कि बातचीत के दूसरे दौर में भी उनकी प्रमुख मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया।
छात्रसंघ पदाधिकारियों का निष्कासन रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) के निर्वाचित पदाधिकारियों के निष्कासन को वापस लेना है।छात्रों का कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई छात्र समुदाय की लोकतांत्रिक आवाज को प्रभावित करती है।आंदोलन में छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू और महासचिव सुनील यादव सहित अन्य विद्यार्थी शामिल हैं।छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्कासन आदेश वापस लेने और छात्र प्रतिनिधियों के अधिकारों को बहाल करने की मांग की है।
13 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन
भूख हड़ताल केवल निष्कासन का आदेश वापस लेने तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय से जुड़ी कुल 13 प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।इनमें चीफ प्रॉक्टर ऑफिस मैनुअल को वापस लेना, यौन उत्पीड़न के खिलाफ जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी (GSCASH) की बहाली और जेएनयू प्रवेश परीक्षा (JNUEE) को दोबारा शुरू करने की मांग शामिल है।इसके अलावा छात्रों ने हॉस्टल, पुस्तकालय, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग भी उठाई है।छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इन मुद्दों पर समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत को लेकर चिंता
लगातार भूख हड़ताल के कारण प्रदर्शनकारी छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि भूख हड़ताल पर बैठे सभी छात्रों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन के अनुसार, निष्कासित छात्रों को भी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रखा जा रहा है।जेएनयू में विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से छात्रों को प्राथमिक उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यकतानुसार अस्पताल रेफरल की सुविधा उपलब्ध है।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
इस मामले में राजनीतिक स्तर पर भी हस्तक्षेप की मांग उठने लगी है।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।18 अक्टूबर को लिखे पत्र में उन्होंने निष्कासन आदेश वापस लेने और छात्रों की लंबित मांगों का समाधान कराने की अपील की।ब्रिटास ने भूख हड़ताल के कारण छात्रों की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त करना चाहिए।
समाधान के लिए बातचीत जारी रखने पर जोर
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जारी आंदोलन ने छात्र अधिकारों, अनुशासनात्मक कार्रवाई और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।प्रशासन का कहना है कि छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए समिति गठित की गई है और बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।दूसरी ओर, छात्र संगठनों का कहना है कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। आने वाले दिनों में बातचीत की दिशा और निष्कासन आदेश पर प्रशासन का रुख तय करेगा कि भूख हड़ताल समाप्त होगी या आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
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