Delhi दिल्ली पुलिस ने 30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैद-उल-अजायब गांव में गिरी एक इमारत के मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। यह चार्जशीट 13 अगस्त को साकेत कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसमें तीन आरोपियों के नाम हैं — इमारत के मालिक करमवीर सिंह और बिल्डर मनीष खत्री व अविनाश गुप्ता। पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 105 (गैर-इरादतन हत्या), 290 (इमारत को गिराने, मरम्मत या निर्माण के दौरान लापरवाही भरा व्यवहार), 125(a) (लापरवाही या जल्दबाजी भरे काम से चोट पहुंचाना जिससे इंसानी जान या सुरक्षा को खतरा हो), 125(b) (ऐसे काम से गंभीर चोट पहुंचाना) और 3(5) (साझा इरादा) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
मेहरौली पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के मुताबिक, यह इमारत सैद-उल-अजायब की गली नंबर 5 में थी। पुलिस को शाम करीब 7:35 बजे गश्त कर रहे कर्मचारियों से इमारत गिरने की सूचना मिली, जिन्होंने अपने साथियों और इमरजेंसी एजेंसियों को अलर्ट किया। पुलिस को पहली कॉल शाम 7:38 बजे मिली, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू किया गया।
इमारत में कई ऑफिस और एक कैफे था। इमारत से सटी जगह पर एक महिला किचन भी चलाती थी। FIR में कहा गया है कि हादसे के समय लोग खाना खा रहे थे, जबकि स्टाफ किचन में मौजूद था। इमारत किचन के ऊपर गिरी, जिससे कई लोग मलबे के नीचे दब गए। बचाव टीमों ने कई पीड़ितों को बाहर निकाला, जबकि कुछ लोग मलबे के नीचे दबे हुए मिले।
इस चार्जशीट पर 22 अगस्त को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के सामने सुनवाई होगी।
इससे पहले, दिल्ली सरकार के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) को इस कमर्शियल बिल्डिंग के गिरने के लिए "मुख्य रूप से जिम्मेदार" ठहराया गया था। जांच में MCD पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई न करने और जांच को गुमराह करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया था। साउथ दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी को जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें कहा गया है कि इस हादसे को रोका जा सकता था। यह हादसा बिना मंज़ूरी के किए गए स्ट्रक्चरल बदलावों (जैसे गैर-कानूनी तीसरी और चौथी मंज़िल बनाना) और MCD के बिल्डिंग बायलॉज़ को लागू न कर पाने की वजह से हुआ। 30 मई को गिरी इस बहुमंज़िला इमारत के हादसे में छह लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए।
जांच के मुताबिक, MCD को 9 मार्च को गैर-कानूनी निर्माण के बारे में शिकायत मिली थी, लेकिन उसने दो महीने से ज़्यादा समय तक न तो कोई जांच की, न नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की और न ही तोड़-फोड़ या रोकथाम के लिए कोई कार्रवाई की। रिपोर्ट में बताया गया है कि गैर-कानूनी तीसरी और चौथी मंज़िल के खिलाफ़ आधिकारिक तौर पर कार्रवाई 27 मई को शुरू की गई, जबकि कथित तौर पर ये मंज़िलें इमारत गिरने से 3 महीने पहले ही बना ली गई थीं। जांच में आरोप लगाया गया है कि हादसे के बाद MCD अधिकारियों ने "झूठे और मनगढ़ंत" दस्तावेज़ तैयार किए - जिनमें 27 मई का 'शो-कॉज़ नोटिस' और 29 मई का 'काम रोकने का नोटिस' शामिल है - ताकि यह गलत धारणा बनाई जा सके कि हादसे से पहले ही कार्रवाई की गई थी।