7 अगस्त से पहले AAP की पहल, विधानसभा में प्रश्नकाल जोड़ने की स्पीकर से अपील
नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से महत्वपूर्ण मांग करते हुए सत्र में प्रश्नकाल शामिल करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि प्रश्नकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधायी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, जिसके माध्यम से विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायक जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाकर सरकार से जवाब मांगते हैं। AAP ने आरोप लगाया कि यह लगातार दूसरा विधानसभा सत्र होगा, जिसमें प्रश्नकाल प्रस्तावित नहीं है, जिससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका प्रभावित होगी और सरकार की जवाबदेही भी कम होगी।
बुधवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में AAP के प्रवक्ता एवं बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की समस्याओं को सरकार के सामने रखने और उनके समाधान की दिशा में जवाबदेही तय करने का भी सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे, विकास कार्यों में आ रही समस्याएं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कमियों पर सवाल पूछते हैं। यदि प्रश्नकाल ही नहीं होगा तो जनप्रतिनिधियों के पास जनता की आवाज प्रभावी तरीके से उठाने का अवसर सीमित हो जाएगा।
संजीव झा ने कहा कि लगातार दूसरे सत्र में प्रश्नकाल का न होना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और आगामी मॉनसून सत्र के एजेंडे में प्रश्नकाल को शामिल किया जाए, ताकि सदन की कार्यवाही अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सके।
AAP की इस मांग का समर्थन कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने भी किया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल किसी भी विधानसभा या संसद की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इसके माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधि सीधे सरकार से सवाल पूछते हैं और विभागों की कार्यप्रणाली पर जवाब मांगते हैं। उनका कहना था कि जनता ने विधायकों को अपनी समस्याएं उठाने के लिए चुना है और प्रश्नकाल इसी जिम्मेदारी को निभाने का सबसे प्रभावी मंच है।
कुलदीप कुमार ने कहा कि यदि प्रश्नकाल नहीं होगा तो सरकार से जवाब मांगने की प्रक्रिया कमजोर होगी और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि जनहित और विधायिका की गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रश्नकाल को मॉनसून सत्र का हिस्सा बनाया जाए। उनके अनुसार इससे न केवल सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होगी बल्कि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी मजबूत होगा।
इस बीच दिल्ली सरकार ने पहले ही विधानसभा के मॉनसून सत्र की तारीखों की घोषणा कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दिल्ली विधानसभा का मॉनसून सत्र 7 अगस्त से 11 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार इस अवधि में सदन की कार्यवाही तीन दिन चलेगी, जिसमें विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि मॉनसून सत्र के दौरान दिल्ली के विकास, आधारभूत ढांचे, जनकल्याणकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक निर्णय लेने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही सरकार का प्रयास रहेगा कि सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो और विकास कार्यों को गति मिले।
हालांकि AAP का कहना है कि विकास और योजनाओं पर चर्चा जितनी जरूरी है, उतना ही आवश्यक प्रश्नकाल भी है, क्योंकि यही वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सरकार की जवाबदेही तय होती है। पार्टी का मानना है कि यदि प्रश्नकाल को शामिल नहीं किया गया तो विपक्ष की भूमिका सीमित हो जाएगी और जनता के कई महत्वपूर्ण सवाल सदन तक नहीं पहुंच पाएंगे।
अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी है। यदि प्रश्नकाल को शामिल किया जाता है तो मॉनसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न जनहित के मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। वहीं यदि मौजूदा कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होता, तो प्रश्नकाल को लेकर राजनीतिक विवाद और अधिक गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।