खास किस्म के Mango ने खींचा सबका ध्यान

Update: 2026-07-03 12:07 GMT
New Delhi नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों मैंगो फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है, जो 3 जुलाई से 5 जुलाई तक जनकपुरी में चलेगा। इस फेस्टिवल में देशभर से आमों की कई किस्में प्रदर्शनी के लिए लाई गई हैं, लेकिन इस बार एक खास आम पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। यह विशाल और आकर्षक आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रुक-रुककर पहुंच रहे हैं और उसके साथ फोटो व वीडियो भी बना रहे हैं।
इस खास आम का नाम ‘मोदी मैंगो’ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इसे लखनऊ के मलिहाबाद के बागवानी विशेषज्ञ शादाब अली ने तैयार किया है। शादाब अली ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से मलिहाबाद की कदीम चंदन नर्सरी में इस खास किस्म को विकसित करने पर काम कर रहे थे। लंबे समय की मेहनत के बाद यह अनोखा आम तैयार हुआ है, जो अपने आकार और गुणवत्ता के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है।
इस आम की सबसे बड़ी खासियत इसका वजन है, जो लगभग 2 किलो बताया जा रहा है। इसके अलावा इसकी बनावट भी बेहद आकर्षक है। यह हरे रंग का बड़ा आम है, जिसकी गुठली सामान्य आमों की तुलना में काफी छोटी है और इसका छिलका भी बेहद पतला है। स्वाद के मामले में इसे बेहद मीठा बताया जा रहा है, जिससे यह और भी खास बन जाता है।
शादाब अली ने बताया कि इस किस्म को तैयार करने में उनके परिवार का भी योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता साजिद अली प्रधानमंत्री Narendra Modi के कार्यों से प्रभावित थे, जिसके चलते इस आम का नाम ‘मोदी मैंगो’ रखा गया। यह नाम अब पूरे फेस्टिवल में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
दिल्ली मैंगो फेस्टिवल में इस आम को देखने के लिए लगातार लोगों की भीड़ उमड़ रही है। इसे न केवल आम दर्शक बल्कि कई विशिष्ट लोग और कलाकार भी देखने पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इसे दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta तक भी दिखाया जा चुका है, जिन्होंने इसकी सराहना की है।
शादाब अली के अनुसार, यह किस्म अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है। इसके पौधों को तैयार करने का काम चल रहा है और इसमें अभी 2 से 3 साल का समय और लग सकता है। इसके बाद इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में लाने की योजना है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर से इस आम के पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नवाचार भारतीय बागवानी क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं। बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता वाली किस्में न केवल किसानों की आय बढ़ा सकती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत की पहचान मजबूत कर सकती हैं।
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