नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने महत्वपूर्ण पहल की है। गुरुवार को डीडीए ने इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के दिल्ली चैप्टर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों और हरित क्षेत्रों में विशेष 'हेरिटेज और नेचर वॉक' आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को दिल्ली के इतिहास, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक संपदा से परिचित कराना है।समझौते के तहत 24 अक्टूबर से अगले छह महीनों में दिल्ली के छह स्थानों पर कुल 12 निर्देशित हेरिटेज और नेचर वॉक आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञ प्रतिभागियों को ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराएंगे।
ऐतिहासिक स्थलों को करीब से जान सकेंगे लोग
डीडीए के अनुसार, इस पहल के माध्यम से दिल्लीवासियों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को राजधानी की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।हेरिटेज वॉक के दौरान विशेषज्ञ विभिन्न ऐतिहासिक स्मारकों, प्राचीन संरचनाओं और सांस्कृतिक स्थलों के महत्व के बारे में जानकारी देंगे। वहीं नेचर वॉक में प्रतिभागियों को हरित क्षेत्रों, वनस्पतियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पहलुओं से परिचित कराया जाएगा।प्राधिकरण का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों में ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उनके संरक्षण की भावना भी विकसित करेंगे।
संजय वन में उपराज्यपाल ने किया था हेरिटेज वॉक का नेतृत्व
इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू ने संजय वन में आयोजित हेरिटेज वॉक का नेतृत्व किया था।दो अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 200 लोगों ने हिस्सा लिया था। कार्यक्रम में दक्षिण दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, महरौली के विधायक गजेंद्र यादव और डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवण कुमार भी मौजूद रहे।इस दौरान प्रतिभागियों को संजय वन में स्थित ऐतिहासिक संरचनाओं और प्राचीन लालकोट की दीवार से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी गई।इंटैक दिल्ली चैप्टर की सलाहकार स्वप्ना लिडल ने प्रतिभागियों को इन संरचनाओं के ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के बारे में बताया।
दिल्ली रिज की विरासत पर विशेष ई-बुक लॉन्च
संजय वन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने 'एक्सप्लोरिंग द दिल्ली रिज: रिवाइविंग द हेरिटेज ऑफ द लंग्स ऑफ दिल्ली' नामक ई-बुक भी लॉन्च की थी।डीडीए और इंटैक के संयुक्त प्रयास से तैयार इस डिजिटल पुस्तक में दिल्ली रिज के ऐतिहासिक स्थलों और प्राकृतिक विरासत की जानकारी दी गई है।ई-बुक में उत्तरी, मध्य, दक्षिण-मध्य और दक्षिणी रिज क्षेत्रों में मौजूद महत्वपूर्ण धरोहरों का उल्लेख किया गया है।इसके माध्यम से नागरिक दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
243 ऐतिहासिक संरचनाओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दिल्ली रिज क्षेत्र में स्थित 243 ऐतिहासिक संरचनाओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण है।इन स्थलों को आठ विशेष हेरिटेज ट्रेल से जोड़ा गया है। इसके अलावा ई-बुक में डिजिटल मानचित्र, तस्वीरें और क्यूआर कोड आधारित जानकारी उपलब्ध कराई गई है।इस व्यवस्था से पर्यटक और शोधकर्ता ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति, उनके महत्व और वहां पहुंचने के रास्तों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।डिजिटल तकनीक के उपयोग से विरासत स्थलों को युवाओं और नई पीढ़ी के लिए अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया गया है।
दिल्ली रिज के संरक्षण पर विशेष ध्यान
दिल्ली रिज राजधानी के महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र शहर के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।यहां प्राकृतिक वनस्पतियों के साथ कई ऐतिहासिक संरचनाएं भी मौजूद हैं। इनमें से अनेक स्थल आम लोगों के बीच कम चर्चित हैं।डीडीए और इंटैक का प्रयास इन स्थलों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण को बढ़ावा देना है।इससे पहले भी दोनों संस्थाओं ने दिल्ली रिज में स्थित ऐतिहासिक संरचनाओं की पहचान और उनके संरक्षण के लिए सहयोग किया था।
पर्यटन और विरासत संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि हेरिटेज और नेचर वॉक जैसे कार्यक्रम राजधानी में सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित कर सकते हैं।इन कार्यक्रमों से लोग न केवल ऐतिहासिक स्थलों को करीब से देख सकेंगे, बल्कि दिल्ली के बदलते स्वरूप और उसकी प्राकृतिक संपदा के महत्व को भी समझ पाएंगे।डीडीए की इस पहल से राजधानी के कम प्रसिद्ध विरासत स्थलों की पहचान बढ़ने और उनके संरक्षण के प्रति नागरिकों की भागीदारी मजबूत होने की उम्मीद है।
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