New Delhi नई दिल्ली : 3 जुलाई 2026: देश की रक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) की बैठक में लगभग 52,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत खरीद से जुड़े कई प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान की गई है। यह मंजूरी सैन्य उपकरणों और हथियारों की खरीद प्रक्रिया का पहला प्रशासनिक चरण होती है, जिसके बाद आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
इस बैठक में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इनमें आधुनिक तकनीक से लैस हथियार और सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं, जो भविष्य की युद्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही हैं।
भारतीय सेना के लिए जिन प्रमुख प्रणालियों को मंजूरी दी गई है, उनमें एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम ‘आकाश तरंग’ शामिल है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) को पहचानने, जाम करने और निष्क्रिय करने में सक्षम होगी, जिससे सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और मजबूत होगी।
इसके अलावा मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) सिस्टम को भी मंजूरी मिली है। यह प्रणाली पैदल सैनिकों को अत्याधुनिक क्षमता प्रदान करेगी, जिससे वे दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और अन्य मैकेनाइज्ड खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकेंगे। यह सिस्टम कम दूरी में उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य भेदने की क्षमता रखता है।
बैठक में मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) वेपन सिस्टम और वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इन प्रणालियों का उद्देश्य हवाई हमलों से रक्षा को और मजबूत करना है, जिससे किसी भी प्रकार के हवाई खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके।
इसके साथ ही टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है, जो युद्ध के दौरान टैंकों को आने वाले हमलों से बचाने में मदद करेगा। यह तकनीक आधुनिक युद्ध प्रणाली में सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम को मंजूरी देकर उठाया गया है। यह ड्रोन तकनीक लक्ष्य पर सटीक हमला करने में सक्षम होती है और आधुनिक युद्ध रणनीति में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी प्रणालियों की खरीद से भारतीय सेनाओं की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बनेगी। यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।