9 अरब डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, भारत-सऊदी के बीच आज अहम बातचीत
भारत-सऊदी आज करेंगे मंथन
नई दिल्ली: भारत और सऊदी अरब के बीच समुद्र के नीचे करीब 2,100 किलोमीटर लंबा बिजली ट्रांसमिशन लिंक बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर सोमवार, 5 अक्टूबर को उच्चस्तरीय बातचीत होने वाली है। प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब 9 अरब डॉलर है और इसकी बिजली ट्रांसमिशन क्षमता करीब 3 गीगावाट (GW) रखने की योजना है। दोनों देशों के बीच होने वाली बैठक में परियोजना की व्यवहार्यता, लागत और इसे व्यावसायिक रूप से उपयोगी बनाने के विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है।
इस प्रस्तावित बिजली लिंक में हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। समुद्र के नीचे बिछने वाला केबल भारत और सऊदी अरब के बिजली ग्रिड को सीधे जोड़ सकेगा। इससे जरूरत के मुताबिक दोनों देशों के बीच बिजली का आदान-प्रदान संभव हो सकता है। परियोजना की विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जिसे भारत-सऊदी अरब के जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन एनर्जी के सामने रखा जाना है।
भारत ने इस परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी पर करीब एक साल काम किया है। शुरुआती दौर में इसकी लागत करीब 5 अरब डॉलर मानी जा रही थी, लेकिन विस्तृत अध्ययन के बाद अनुमान बढ़कर करीब 9 अरब डॉलर पहुंच गया है। इसी वजह से आज की बैठक में परियोजना की लागत कम करने और इसके लिए मजबूत बिजनेस मॉडल तैयार करने के तरीकों पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है।
अगर यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो भारत और सऊदी अरब के ऊर्जा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ सकता है। अभी दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बड़ी भूमिका है। समुद्र के नीचे बिजली लिंक तैयार होने के बाद दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार का नया रास्ता खुल सकता है।
प्रस्तावित सिस्टम की खास बात यह होगी कि बिजली का प्रवाह जरूरत के अनुसार दोनों दिशाओं में किया जा सकेगा। किसी समय भारत के पास अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने पर उसे सऊदी अरब भेजने की संभावना बनेगी, जबकि जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब से भारत की ओर भी बिजली लाई जा सकेगी। इससे बिजली की मांग और आपूर्ति के संतुलन में मदद मिलने के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की संभावना है।
यह योजना अक्षय ऊर्जा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है, जबकि सऊदी अरब भी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर निवेश कर रहा है। दोनों देशों के ग्रिड आपस में जुड़ने पर भविष्य में अक्षय ऊर्जा के सीमा पार व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत और सऊदी अरब ने सितंबर 2023 में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सहयोग के लिए समझौता किया था। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली, दोनों देशों के बीच ग्रिड कनेक्टिविटी, हाइड्रोजन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी। इसके बाद अक्टूबर 2023 में इलेक्ट्रिकल इंटरकनेक्शन को लेकर विशेष समझौता हुआ और अक्टूबर 2024 में भारतीय तथा सऊदी ट्रांसमिशन संस्थाओं के बीच फिजिबिलिटी स्टडी से जुड़ा समझौता किया गया।
यह परियोजना भारत की One Sun One World One Grid (OSOWOG) पहल से भी जुड़ी हुई है। इस विजन का उद्देश्य अलग-अलग देशों के बिजली ग्रिड को जोड़कर अक्षय ऊर्जा के सीमा पार इस्तेमाल और व्यापार को आसान बनाना है। भारत UAE, ओमान, सिंगापुर, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के साथ भी बिजली इंटरकनेक्शन की संभावनाएं तलाश रहा है।
आज होने वाली बैठक में भारत की सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, दोनों देशों के ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और सऊदी अरब की नेशनल इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक के बाद यह साफ हो सकता है कि करीब 9 अरब डॉलर की इस विशाल परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देश किस मॉडल पर काम करेंगे।