श्रद्धा वालकर केस: अंतिम संस्कार पर HC ने समय-सीमा तय करने से किया इनकार
नई दिल्ली। बहुचर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पहले से ही प्रतिदिन हो रही है और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी श्रद्धा वालकर के भाई की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
श्रद्धा वालकर के भाई ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए। याचिका में कहा गया था कि लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के कारण श्रद्धा के अंतिम संस्कार में देरी हो रही है। श्रद्धा के अवशेष अभी भी मामले में सबूत यानी केस प्रॉपर्टी के रूप में सुरक्षित रखे गए हैं, जिसके कारण परिवार अंतिम संस्कार की अंतिम प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई नियमित रूप से हो रही है और ट्रायल कोर्ट इस केस को प्रतिदिन सुन रहा है। अदालत ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में ट्रायल की समय-सीमा पहले से तय करना कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। गवाहों के बयान, सबूतों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के कई चरणों को पूरा करना आवश्यक होता है।
श्रद्धा वालकर हत्याकांड वर्ष 2022 में सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। पुलिस के अनुसार, श्रद्धा की हत्या के मामले में उसके लिव-इन पार्टनर आफताब पूनावाला को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आफताब ने श्रद्धा की हत्या कर उसके शव के टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने लगाने की कोशिश की।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कई महत्वपूर्ण सबूत पेश किए हैं। जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर बरामद किए गए साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य जांच रिपोर्ट को केस का हिस्सा बनाया है। अदालत में इन सभी सबूतों की कानूनी जांच की जा रही है।
श्रद्धा के परिवार की ओर से लगातार यह मांग उठाई जाती रही है कि मामले की सुनवाई जल्द पूरी हो ताकि उन्हें न्याय मिल सके और वे श्रद्धा का अंतिम संस्कार कर सकें। भाई की याचिका में भी इसी पीड़ा का जिक्र किया गया था। उनका कहना था कि मामले के लंबा खिंचने से परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल की कोई अंतिम समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई तेजी से चल रही है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट अपनी प्रक्रिया के अनुसार मामले को आगे बढ़ा रहा है और सभी पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना जरूरी है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर आपराधिक मामलों में अदालतें जल्द सुनवाई की कोशिश करती हैं, लेकिन आरोपी के अधिकारों और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। किसी भी मामले में फैसला सभी सबूतों और गवाहियों की पूरी जांच के बाद ही दिया जाता है।
फिलहाल श्रद्धा वालकर हत्याकांड का ट्रायल जारी है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में नियमित रूप से आगे बढ़ेगी। परिवार की उम्मीद है कि न्यायिक प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और उन्हें अपनी बेटी के अंतिम संस्कार की अनुमति मिल सकेगी।