नई दिल्ली। देश में डॉक्टर बनने के लिए हर साल लाखों विद्यार्थी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) में शामिल होते हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है, लेकिन इस बार मेडिकल एडमिशन की एक अलग ही तस्वीर सामने आई है। नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग के कई चरण पूरे होने के बावजूद एमबीबीएस की सैकड़ों सीटों पर उम्मीदवार नहीं मिल पाए हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड की आवंटन सूची में कम रैंक वाले अभ्यर्थियों को भी अवसर मिलने की चर्चा है। करीब 12 लाख तक की रैंक वाले उम्मीदवारों के प्रवेश की खबरों ने मेडिकल शिक्षा की लागत और कॉलेजों में खाली सीटों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने एमबीबीएस के स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड और बीडीएस तथा बीएससी नर्सिंग के पांचवें राउंड के परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए हैं। उम्मीदवार MCC की वेबसाइट पर जाकर आवंटन सूची देख सकते हैं। इस सूची में उम्मीदवार की रैंक, आवंटित कॉलेज, पाठ्यक्रम और श्रेणी जैसी जानकारियां दी गई हैं।
सामने आए आंकड़ों के अनुसार, स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए एमबीबीएस की कुल 946 रिक्त सीटें दर्ज की गई थीं। हालांकि, प्रारंभिक आवंटन सूची में केवल 537 एमबीबीएस सीटों का आवंटन दिखाई दिया। इस तरह 409 सीटों पर प्रारंभिक आवंटन नहीं हो सका। यानी उपलब्ध सीटों के मुकाबले लगभग 56.8 प्रतिशत सीटें ही आवंटित हो पाईं।
यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नीट यूजी देश की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। लाखों विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए वर्षों तक तैयारी करते हैं। इसके बावजूद काउंसलिंग के अंतिम चरणों तक कुछ संस्थानों में सीटें खाली रह जाना मेडिकल शिक्षा व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
दरअसल, सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा अंतर होता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अपेक्षाकृत कम फीस होने के कारण विद्यार्थियों की प्राथमिकता अधिक रहती है। दूसरी ओर, कई निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च काफी ज्यादा होता है। ऐसे में नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी विद्यार्थी आर्थिक कारणों से उपलब्ध सीट स्वीकार नहीं कर पाते।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में प्रवेश केवल नीट रैंक पर निर्भर नहीं करता। उम्मीदवार की श्रेणी, काउंसलिंग कोटा, कॉलेज की उपलब्ध सीटें, फीस, लोकेशन और भरे गए विकल्प भी आवंटन को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि कुछ संस्थानों में अपेक्षाकृत कम रैंक वाले अभ्यर्थियों को भी प्रवेश का अवसर मिल सकता है, जबकि लोकप्रिय सरकारी कॉलेजों की सीटें काफी ऊंची रैंक पर भर जाती हैं।
हालांकि, 12 लाख रैंक पर एमबीबीएस प्रवेश मिलने की चर्चा को सभी
कॉलेजों
के लिए सामान्य कटऑफ नहीं समझना चाहिए। किसी विशेष उम्मीदवार को सीट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसी रैंक वाले प्रत्येक विद्यार्थी को प्रवेश मिल सकता है। वास्तविक स्थिति समझने के लिए संबंधित कॉलेज, कोटा और आवंटित श्रेणी की जांच आवश्यक है।
स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड का आयोजन उन सीटों को भरने के लिए किया जाता है, जो नियमित काउंसलिंग और स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद भी खाली रह जाती हैं। कई बार पहले सीट आवंटित होने के बावजूद विद्यार्थी संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट नहीं करते। कुछ उम्मीदवार आर्थिक कारणों, दस्तावेजों की समस्या या दूसरे संस्थान में प्रवेश लेने के कारण भी सीट छोड़ देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में खाली सीटों को भरने के लिए अतिरिक्त काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है।
इस बार एमबीबीएस के साथ बीडीएस और बीएससी नर्सिंग में भी सीट आवंटन किया गया है। उपलब्ध प्रारंभिक सूची के अनुसार, तीनों पाठ्यक्रमों में कुल 811 आवंटन दर्ज किए गए। इनमें एमबीबीएस के 537, बीडीएस के 208 और बीएससी नर्सिंग के 66 आवंटन शामिल हैं।
मेडिकल एडमिशन के अंतिम चरण में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने के पीछे फीस को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई के दौरान केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि हॉस्टल, भोजन, परीक्षा और अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं। कई परिवारों के लिए यह आर्थिक बोझ काफी अधिक हो सकता है।
इसके अतिरिक्त कॉलेज की मान्यता, शिक्षण सुविधाएं, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, क्लिनिकल प्रशिक्षण और भविष्य में उच्च शिक्षा की संभावनाएं भी विद्यार्थियों के निर्णय को प्रभावित करती हैं। विद्यार्थी केवल एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बजाय ऐसे संस्थान को प्राथमिकता देते हैं, जहां उन्हें अच्छी गुणवत्ता का प्रशिक्षण मिल सके।
मेडिकल शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि खाली सीटों की समस्या को केवल उम्मीदवारों की कमी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि उपलब्ध सीटें विद्यार्थियों की आर्थिक क्षमता और अपेक्षाओं के अनुरूप हैं या नहीं। फीस की पारदर्शिता और मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
इस बीच, MCC की ओर से जारी आवंटन सूची देखने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर जाना होगा। इसके बाद यूजी मेडिकल काउंसलिंग के अंतर्गत करंट इवेंट्स सेक्शन में संबंधित परिणाम की पीडीएफ खोलनी होगी। उम्मीदवार अपने रोल नंबर या नीट रैंक की सहायता से आवंटन की स्थिति देख सकते हैं।
जिन अभ्यर्थियों को सीट आवंटित हुई है, उन्हें निर्धारित समयसीमा में संबंधित संस्थान की रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए नीट स्कोरकार्ड, एडमिट कार्ड, पहचान पत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और लागू होने पर श्रेणी संबंधी दस्तावेज तैयार रखना जरूरी है। रिपोर्टिंग की अंतिम तारीख और दस्तावेजों की सूची के लिए उम्मीदवारों को MCC की नवीनतम आधिकारिक सूचना देखनी चाहिए।
फिलहाल नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग ने एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखा है। जब देश में डॉक्टर बनने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों की संख्या इतनी अधिक है, तब मेडिकल कॉलेजों में सैकड़ों सीटें खाली क्यों रह रही हैं? इस सवाल का जवाब केवल प्रवेश परीक्षा की रैंक में नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा की फीस, कॉलेजों की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की वास्तविक परिस्थितियों में भी तलाशना होगा।
Tags: