BUSINESS: आज के समय में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन शॉपिंग, मूवी टिकट, ट्रैवल बुकिंग, EMI पर सामान खरीदने से लेकर रोजमर्रा के खर्चों तक लोग क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। खासकर युवाओं में क्रेडिट कार्ड का क्रेज काफी बढ़ा है। बैंक भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स, डिस्काउंट और एयरपोर्ट लाउंज जैसी सुविधाएं देते हैं।
लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर बैंक उनकी सैलरी से ज्यादा क्रेडिट लिमिट क्यों देते हैं? अगर किसी व्यक्ति की सैलरी 50 हजार रुपये है तो उसे 70 हजार या इससे ज्यादा की लिमिट कैसे मिल जाती है? इसके पीछे बैंक कई तरह के फैक्टर देखते हैं।
बैंक सिर्फ आपकी सैलरी के आधार पर क्रेडिट लिमिट तय नहीं करते। इसके लिए ग्राहक का क्रेडिट स्कोर, पुराने लोन की जानकारी, पेमेंट हिस्ट्री, आय का स्तर और वित्तीय व्यवहार देखा जाता है। अगर किसी ग्राहक का क्रेडिट स्कोर अच्छा है और उसने पहले समय पर बिलों का भुगतान किया है तो बैंक उसे ज्यादा लिमिट देने में भरोसा करते हैं।
इसके अलावा बैंक के लिए ज्यादा क्रेडिट लिमिट देना एक बिजनेस रणनीति भी होती है। जब ग्राहक क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करता है तो बैंक को दुकानदारों यानी मर्चेंट से कमीशन मिलता है। वहीं अगर ग्राहक समय पर पूरा भुगतान नहीं करता और बकाया राशि आगे बढ़ती रहती है तो बैंक ब्याज और लेट फीस के जरिए कमाई करता है।
हालांकि ज्यादा क्रेडिट लिमिट का मतलब यह नहीं है कि ग्राहक अपनी पूरी लिमिट खर्च कर दे। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए ताकि भविष्य में आर्थिक परेशानी न हो।
कितना खर्च करना चाहिए क्रेडिट कार्ड से?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से अपनी टेक-होम सैलरी का करीब 30 प्रतिशत तक ही खर्च करना बेहतर माना जाता है। उदाहरण के लिए अगर आपकी मासिक टेक-होम सैलरी 60 हजार रुपये है तो कोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड का खर्च 18 हजार रुपये के आसपास ही रहे।
क्रेडिट कार्ड की लिमिट का ज्यादा इस्तेमाल करने से क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ जाता है, जिसका असर क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति लगातार अपनी लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करता है तो बैंक उसे ज्यादा जोखिम वाला ग्राहक मान सकते हैं।
मिनिमम ड्यू भरने की आदत से बचें
कई लोग क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल भरने की बजाय सिर्फ मिनिमम ड्यू अमाउंट का भुगतान करते हैं। यह आदत आगे चलकर बड़ी परेशानी पैदा कर सकती है। मिनिमम ड्यू भरने से आपका कार्ड डिफॉल्ट नहीं माना जाता, लेकिन बाकी बची रकम पर बैंक भारी ब्याज वसूल सकता है।
इसलिए हर महीने कोशिश करनी चाहिए कि क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल समय पर जमा किया जाए। सिर्फ मिनिमम पेमेंट करते रहने से कर्ज बढ़ सकता है और भविष्य में बिल चुकाना मुश्किल हो सकता है।
एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखना सही या गलत?
आजकल कई लोग अलग-अलग जरूरतों के लिए कई क्रेडिट कार्ड रखते हैं। कोई ऑनलाइन शॉपिंग के लिए कार्ड रखता है तो कोई फ्यूल या ट्रैवल के लिए अलग कार्ड इस्तेमाल करता है। कई कार्ड रखना गलत नहीं है, लेकिन उन्हें सही तरीके से मैनेज करना बेहद जरूरी है।
अगर आपके पास एक से ज्यादा कार्ड हैं तो सभी की पेमेंट डेट याद रखें। इसके लिए ऑटो पेमेंट सुविधा या मोबाइल रिमाइंडर का इस्तेमाल किया जा सकता है। कई कार्ड होने पर लापरवाही से पेमेंट मिस होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है।
क्रेडिट कार्ड एक सुविधाजनक वित्तीय साधन है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। ज्यादा लिमिट देखकर जरूरत से ज्यादा खर्च करना नुकसानदायक हो सकता है। समझदारी से इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड न सिर्फ सुविधा देता है बल्कि आपका क्रेडिट स्कोर भी मजबूत बना सकता है। इसलिए हमेशा अपनी आय के अनुसार खर्च करें और समय पर पूरा भुगतान करने की आदत डालें।