बिजनेस : महंगाई से राहत देने के लिए सरकार समय-समय पर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते यानी Dearness Allowance (DA) में बढ़ोतरी करती है। DA बढ़ने से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में सीधा इजाफा होता है, लेकिन इसके साथ ही इनकम टैक्स की गणना में भी बदलाव आ सकता है। कई कर्मचारी यह समझ नहीं पाते कि DA बढ़ने के बाद उनकी टैक्स देनदारी कितनी बढ़ेगी और ITR भरते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
दरअसल, DA सैलरी का ही एक हिस्सा माना जाता है और यह आमतौर पर टैक्स के दायरे में आता है। यानी DA में हुई बढ़ोतरी आपकी कुल आय को बढ़ा सकती है और अगर आपकी टैक्सेबल इनकम किसी टैक्स स्लैब में पहुंच जाती है तो आपको अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।
DA बढ़ने से टैक्स कैसे बढ़ सकता है
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये प्रति माह है। अगर DA में बढ़ोतरी के बाद हर महीने 5 हजार रुपये अतिरिक्त मिलने लगते हैं, तो सालाना आय में 60 हजार रुपये का इजाफा हो जाएगा। यह अतिरिक्त रकम आपकी कुल ग्रॉस सैलरी में जुड़ जाएगी।
इसके बाद टैक्स की गणना करते समय आपकी कुल आय, मिलने वाली छूट और निवेश के आधार पर तय होगा कि कितना टैक्स देना है। सिर्फ DA बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पूरी बढ़ी हुई रकम पर ही टैक्स लगेगा, बल्कि आपकी पूरी टैक्सेबल इनकम के हिसाब से टैक्स कैलकुलेट किया जाता है।
ITR भरते समय ₹1 की गलती भी पड़ सकती है भारी
इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय छोटी-सी गलती भी परेशानी खड़ी कर सकती है। अगर आपने सैलरी, DA, बोनस, बैंक ब्याज या अन्य आय की जानकारी सही नहीं भरी तो इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है।
कई कर्मचारी Form-16 और ITR में दर्ज आय का मिलान नहीं करते। इससे टैक्स क्रेडिट, TDS और वास्तविक आय में अंतर आ सकता है। इसलिए ITR भरने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है।
ITR में किन चीजों की करें जांच?
ITR फाइल करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
* Form-16 में दर्ज सैलरी और DA की जानकारी सही है या नहीं।
* AIS (Annual Information Statement) में दिखाई गई आय का मिलान करें।
* बैंक खाते से मिले ब्याज की जानकारी जरूर जोड़ें।
* निवेश और टैक्स बचत से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें।
* TDS कटौती की जानकारी सही भरें।
नई टैक्स व्यवस्था में क्या है नियम?
नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स स्लैब और छूट के नियमों के अनुसार करदाता की टैक्स देनदारी तय होती है। वर्तमान नियमों के तहत कई वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नई टैक्स व्यवस्था सरल विकल्प मानी जा रही है, क्योंकि इसमें कम दरों के साथ सीमित छूट का प्रावधान है।
वहीं, जिन कर्मचारियों के पास होम लोन, इंश्योरेंस, निवेश और अन्य कटौतियां हैं, वे पुरानी टैक्स व्यवस्था में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए टैक्स व्यवस्था चुनने से पहले अपनी आय और उपलब्ध छूट का हिसाब लगाना जरूरी है।
DA बढ़ने के बाद कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
DA बढ़ने के बाद कर्मचारियों को अपनी सालाना आय का नया अनुमान लगाना चाहिए। अगर आय बढ़ने से टैक्स स्लैब बदल रहा है तो पहले से टैक्स प्लानिंग करना फायदेमंद हो सकता है।
इसके लिए कर्मचारी:
* समय पर निवेश करें।
* टैक्स सेविंग विकल्पों को समझें।
* सैलरी स्लिप और Form-16 को सुरक्षित रखें।
* ITR में सही जानकारी दर्ज करें।
गलत जानकारी देने पर क्या हो सकता है?
अगर ITR में गलत जानकारी दी जाती है या आय छिपाई जाती है तो आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है। गलत क्लेम, फर्जी दस्तावेज या आय में अंतर पाए जाने पर ब्याज और जुर्माना भी लग सकता है।
इसलिए टैक्स रिटर्न भरते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। हर जानकारी को जांचने के बाद ही सबमिट करना बेहतर होता है।