बिज़नेस। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद शानदार तेजी देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की ओर से निचले स्तरों पर खरीदारी बढ़ने और आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में सुधार से बाजार को मजबूती मिली। सुबह 11:16 बजे तक बीएसई सेंसेक्स करीब 533 अंक चढ़कर 73,778 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 147 अंकों की बढ़त के साथ 22,845 के आसपास कारोबार कर रहा था। खास बात यह है कि बुधवार को निफ्टी 22,800 का स्तर पार करने में संघर्ष कर रहा था, लेकिन गुरुवार को खरीदारी बढ़ने से यह महत्वपूर्ण स्तर पार करने में सफल रहा।
सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी
गुरुवार को शेयर बाजार की शुरुआत लगभग सपाट रही थी। सेंसेक्स 73,293.99 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 22,699.35 के आसपास कारोबार की शुरुआत करता दिखाई दिया।हालांकि, शुरुआती कारोबार के बाद बाजार में धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ी। रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटी और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में तेजी के कारण प्रमुख सूचकांक ऊपर चढ़ने लगे।सुबह 10:24 बजे तक निफ्टी 0.54 प्रतिशत बढ़कर 22,821.85 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, सेंसेक्स 0.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,693.22 पर कारोबार कर रहा था।इसके बाद भी तेजी जारी रही और निफ्टी ने 22,850 के आसपास के स्तर को छुआ। बाजार में आई इस मजबूती से निवेशकों का रुझान सकारात्मक दिखाई दिया।
बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ था बाजार
इससे पहले बुधवार, 28 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला था। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और आईटी शेयरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए थे।
बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 352.64 अंक यानी 0.48 प्रतिशत टूटकर 73,246.03 पर बंद हुआ था।वहीं, निफ्टी 50 में 50.90 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी और यह 22,698.85 के स्तर पर बंद हुआ था।कारोबार के दौरान बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी आने से सूचकांकों ने दिन के न्यूनतम स्तरों से कुछ सुधार किया था।इससे बाजार विश्लेषकों को संकेत मिला था कि महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर खरीदार सक्रिय बने हुए हैं।
निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर क्यों महत्वपूर्ण?
शेयर बाजार के तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में निफ्टी को इस स्तर के ऊपर टिकने में परेशानी का सामना करना पड़ा है। जैसे ही सूचकांक इसके आसपास पहुंचता है, बाजार में मुनाफावसूली बढ़ने लगती है।मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 22,600 और उसके बाद 22,500 के आसपास है।वहीं, ऊपर की ओर 22,800 और 22,900 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर बताए गए हैं।विश्लेषकों के अनुसार, यदि निफ्टी 22,700 के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो इसमें 22,800 से 22,900 की ओर बढ़ने की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, 22,700 से नीचे कमजोरी आने पर बाजार दोबारा निचले सपोर्ट स्तरों की ओर जा सकता है।
आईटी शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा
गुरुवार के कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रही।बुधवार को आईटी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली थी। इंफोसिस जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट के कारण निफ्टी आईटी इंडेक्स दबाव में रहा था।लेकिन गुरुवार सुबह कई आईटी कंपनियों के शेयरों में सुधार देखा गया। शुरुआती कारोबार में टीसीएस करीब 1.6 प्रतिशत और इंफोसिस लगभग 0.9 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहे थे।विप्रो और टाटा एल्क्सी जैसे शेयरों में भी शुरुआती तेजी दर्ज की गई।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10:24 बजे तक आईटी सेक्टर का सूचकांक करीब 0.5 प्रतिशत बढ़ा हुआ था।इस खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती देने में मदद की। हालांकि, अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आईटी बाजार का रुझान आगे भी भारतीय आईटी शेयरों को प्रभावित कर सकता है।
रिलायंस और जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में तेजी
बाजार में गुरुवार को रिलायंस समूह की कंपनियां भी चर्चा में रहीं।रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में सुबह करीब 1.7 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। वहीं, हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर में भी मजबूती दर्ज की गई।लिस्टिंग के दूसरे कारोबारी दिन जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3.5 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था।इसके अलावा अडानी पोर्ट्स के शेयर में भी तेजी दर्ज हुई। कंपनी के तिमाही नतीजों और परिचालन लाभ से संबंधित अनुमान बढ़ाने के बाद निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।हुंडई मोटर इंडिया के शेयर में भी लगभग 4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का असर
भारतीय शेयर बाजार की चाल पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले का भी प्रभाव देखने को मिला।अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखा है।फेडरल रिजर्व का यह निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। हालांकि, अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंताएं और बॉन्ड यील्ड में तेजी वैश्विक शेयर बाजारों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहने की स्थिति में उभरते बाजारों में विदेशी निवेश की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।इसी कारण भारतीय निवेशक अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं।अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।मध्य पूर्व में आपूर्ति संबंधी जोखिम और वैश्विक तनाव के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने से देश के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।तेल की ऊंची कीमतों का असर परिवहन, विमानन, पेंट और अन्य पेट्रोलियम आधारित उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है।
बैंक निफ्टी के लिए ये स्तर अहम
बैंकिंग सेक्टर में भी गुरुवार को खरीदारी का रुझान देखने को मिला।सुबह 11:16 बजे बैंक निफ्टी करीब 273 अंक बढ़कर 54,540 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, बैंक निफ्टी के लिए 54,000 और 53,750 महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर हैं।वहीं, ऊपर की ओर 54,500 और 54,750 के आसपास रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।बैंकिंग शेयरों में खरीदारी जारी रहने से व्यापक बाजार को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, किसी भी स्तर पर मुनाफावसूली बढ़ने से उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है।
निवेशकों की नजर अब इन प्रमुख संकेतों पर
आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी की चाल काफी हद तक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।बाजार में आईटी, बैंकिंग और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों की गतिविधियां प्रमुख सूचकांकों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए अहम रहेंगी।