NSUT IIF के CEO से स्टार्टअप टिप्स

Update: 2026-07-03 11:32 GMT

Business | व्यापार :आज के समय में ‘स्टार्टअप’ एक ऐसा शब्द बन चुका है जो हर जगह सुनाई देता है। छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक, युवा और आम लोग भी अब अपने आइडिया के दम पर बिजनेस शुरू कर रहे हैं और मार्केट में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि स्टार्टअप क्या होता है, इसे कैसे शुरू किया जाए और क्या इसके लिए लाखों रुपये की जरूरत होती है।

इन सभी सवालों को समझने के लिए नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (NSUT) के इंडस्ट्री इंटरफेस फाउंडेशन (IIF) के सीईओ हिमांशु सिंघल ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप का असली मतलब किसी भी समस्या का समाधान ढूंढना है। चाहे वह पर्यावरण से जुड़ी समस्या हो, किसी सेवा में कमी हो या किसी दैनिक जीवन की चुनौती—अगर कोई व्यक्ति उसका समाधान तकनीक या सेवा के माध्यम से निकाल सकता है, तो वही स्टार्टअप कहलाता है।

हिमांशु सिंघल के अनुसार, स्टार्टअप शुरू करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आपके पास बहुत बड़ा या अनोखा आइडिया हो। बल्कि जरूरी यह है कि आप किसी वास्तविक समस्या को पहचानें और उसका समाधान निकालने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि कई लोग यह सोचते हैं कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए लाखों रुपये चाहिए, लेकिन यह सही नहीं है।

उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति बहुत कम पैसों से भी स्टार्टअप शुरू कर सकता है। शुरुआत छोटे स्तर से की जा सकती है और जैसे-जैसे आइडिया काम करने लगता है, वैसे-वैसे उसमें ग्रोथ आती है। कई स्टार्टअप ऐसे भी हैं जो बहुत सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुए और बाद में बड़े स्तर पर पहुंच गए।

उन्होंने यह भी बताया कि अगर स्टार्टअप किसी असली समस्या को हल करता है और उसके लिए बाजार में ग्राहक मौजूद हैं, तो फंडिंग अपने आप मिलने लगती है। कई बार सरकारी योजनाएं और अलग-अलग संस्थाएं भी ऐसे स्टार्टअप को समर्थन देती हैं जो वास्तविक समस्याओं पर काम करते हैं।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि सबसे बड़ी फंडिंग हमेशा ग्राहक होते हैं। अगर आपका प्रोडक्ट या सर्विस लोगों की जरूरत पूरी करता है, तो आपके पास हमेशा कमाई का रास्ता खुला रहेगा। ऐसे में निवेश की कमी भी बड़ी बाधा नहीं बनती।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्टार्टअप की सफलता का आधार केवल पैसा नहीं, बल्कि समस्या की समझ, समाधान की गुणवत्ता और ग्राहक की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता होती है।

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