बिजनेस : शेयर बाजार में कई बार छोटे भाव वाले स्टॉक्स अचानक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां करीब **2 रुपये के आसपास कारोबार करने वाले एक पेनी स्टॉक में अचानक 20 प्रतिशत का अपर सर्किट लग गया।** इस तेजी के बाद निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस शेयर में इतनी बड़ी खरीदारी क्यों हुई और क्या इसमें पैसा लगाना फायदेमंद हो सकता है।
पेनी स्टॉक यानी कम कीमत वाले शेयर अक्सर छोटे निवेशकों को आकर्षित करते हैं, क्योंकि कम पैसे में ज्यादा शेयर खरीदे जा सकते हैं। लेकिन इन शेयरों में जोखिम भी काफी ज्यादा होता है। कम लिक्विडिटी, सीमित जानकारी और तेज उतार-चढ़ाव के कारण ऐसे शेयरों में निवेश करते समय सावधानी जरूरी होती है।
अचानक क्यों भागा शेयर?
इस तरह के लो-प्राइस शेयरों में तेजी कई कारणों से आ सकती है। कई बार कंपनी से जुड़ी किसी खबर, ऑर्डर मिलने, कर्ज कम होने, बेहतर तिमाही नतीजों या बाजार में बढ़ती खरीदारी के कारण शेयर में तेज उछाल देखने को मिलता है।
हालांकि, कई बार केवल ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने से भी छोटे शेयरों में अचानक अपर सर्किट लग सकता है। बाजार में कई स्टॉक्स 20 प्रतिशत तक के प्राइस बैंड में कारोबार करते हैं, जहां एक दिन में कीमत की अधिकतम सीमा तय होती है।
क्या होता है अपर सर्किट?
जब किसी शेयर की कीमत एक दिन में तय सीमा तक बढ़ जाती है तो उसे अपर सर्किट कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी शेयर की ऊपरी सीमा 20 प्रतिशत तय है और वह उस स्तर तक पहुंच जाता है, तो उस दिन आगे खरीद-बिक्री सीमित हो जाती है।
अपर सर्किट लगना यह दिखाता है कि उस समय शेयर में खरीदारी का दबाव ज्यादा है और बेचने वाले कम हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि शेयर आगे भी लगातार बढ़ता रहेगा।
पेनी स्टॉक में निवेश का आकर्षण
2 रुपये या उससे कम कीमत वाले शेयर छोटे निवेशकों को इसलिए आकर्षित करते हैं क्योंकि इनमें कम पूंजी से बड़ी संख्या में शेयर खरीदे जा सकते हैं।
अगर कोई शेयर 2 रुपये से बढ़कर 4 रुपये हो जाता है तो निवेशक का पैसा दोगुना हो सकता है। यही उम्मीद कई लोगों को पेनी स्टॉक की ओर खींचती है।
लेकिन दूसरी तरफ अगर कंपनी का प्रदर्शन खराब होता है तो ऐसे शेयरों में भारी गिरावट भी आ सकती है।
क्या आपका दांव लगाना चाहिए?
किसी भी पेनी स्टॉक में केवल इसलिए निवेश करना सही नहीं है क्योंकि उसका भाव कम है। शेयर का असली मूल्य कंपनी के कारोबार, कमाई, कर्ज, प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं से तय होता है।
निवेश से पहले इन बातों की जांच जरूर करनी चाहिए:
* कंपनी का बिजनेस मॉडल क्या है?
* कंपनी लगातार मुनाफा कमा रही है या नहीं?
* प्रमोटर की हिस्सेदारी कितनी है?
* कंपनी पर कितना कर्ज है?
* शेयर में रोजाना ट्रेडिंग वॉल्यूम कितना है?
कम कीमत का मतलब सस्ता नहीं
कई निवेशक मानते हैं कि 2 रुपये का शेयर सस्ता है और 2000 रुपये का शेयर महंगा। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता।
अगर किसी कंपनी के 2 रुपये वाले शेयर की वित्तीय स्थिति कमजोर है तो वह महंगा भी हो सकता है। वहीं मजबूत कंपनी का ऊंची कीमत वाला शेयर बेहतर निवेश साबित हो सकता है।
बाजार विशेषज्ञों की सलाह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पेनी स्टॉक्स में निवेश करने वाले लोगों को लालच से बचना चाहिए। लगातार अपर सर्किट देखकर तुरंत निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। खासतौर पर छोटे शेयरों में अफवाहों और सोशल मीडिया टिप्स के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए।
छोटे शेयरों में बड़ा जोखिम
पेनी स्टॉक में सबसे बड़ी समस्या लिक्विडिटी की होती है। कई बार शेयर खरीदना आसान होता है लेकिन गिरावट के समय बेचने में परेशानी आ सकती है।
इसके अलावा कम जानकारी वाली कंपनियों में निवेश करने पर नुकसान का खतरा भी अधिक रहता है।
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