मुंबई। निजी क्षेत्र के RBL बैंक को वित्त वर्ष 2022-23 से जुड़े एक बड़े GST मामले में शो-कॉज नोटिस मिला है। बैंक ने बताया है कि उसे 164.14 करोड़ रुपये की गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) मांग से संबंधित नोटिस प्राप्त हुआ है। इस राशि में लागू ब्याज और जुर्माने की रकम भी शामिल है।

RBL बैंक ने 3 सितंबर 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी गई रेगुलेटरी फाइलिंग में इस मामले की जानकारी साझा की। बैंक ने कहा कि उसे यह नोटिस 2 सितंबर 2026 की तारीख को जारी किया गया था।

बैंक के अनुसार, यह शो-कॉज नोटिस दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर की ओर से जारी किया गया है। नोटिस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 की धारा 73 के तहत जारी किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला बैंक के बुलियन यानी कीमती धातुओं से जुड़े कारोबार से संबंधित है। GST विभाग ने इस मामले में टैक्स की मांग, ब्याज और जुर्माने से जुड़ी राशि का उल्लेख किया है।

RBL बैंक ने अपनी फाइलिंग में बताया कि उसे यह नोटिस मिला है और वह मामले की समीक्षा कर रहा है। बैंक की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया और जवाब दाखिल करने को लेकर कदम उठाए जाएंगे।

GST कानून की धारा 73 के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाती है, जहां टैक्स का भुगतान नहीं होने या कम भुगतान से जुड़ा मामला सामने आता है और इसमें धोखाधड़ी या जानबूझकर टैक्स चोरी का आरोप शामिल नहीं होता।

शो-कॉज नोटिस मिलने का मतलब यह होता है कि संबंधित विभाग किसी संस्था से यह स्पष्टीकरण मांगता है कि उसके खिलाफ टैक्स मांग की कार्रवाई क्यों न की जाए। इसके बाद संस्था को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

RBL बैंक देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। बैंक विभिन्न वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराता है और इसका कारोबार बैंकिंग, लोन, क्रेडिट कार्ड और अन्य वित्तीय उत्पादों तक फैला हुआ है।

बुलियन कारोबार में सोना और अन्य कीमती धातुओं से जुड़े लेन-देन शामिल होते हैं। इस क्षेत्र में टैक्स नियमों का पालन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

GST विभाग समय-समय पर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के टैक्स अनुपालन की जांच करता है। किसी भी तरह की विसंगति मिलने पर विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है या टैक्स डिमांड जारी कर सकता है।

बैंक ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इस मांग को स्वीकार करेगा या इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाएगा। हालांकि, रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए निवेशकों को इस घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है।

वित्तीय बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए ऐसे मामलों की जानकारी शेयर बाजारों को देना जरूरी होता है, ताकि निवेशकों को कंपनी से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी मिल सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े टैक्स नोटिस का असर किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है कि वह राशि कंपनी के आकार और मुनाफे की तुलना में कितनी बड़ी है। साथ ही, अंतिम देनदारी का फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होता है।

RBL बैंक को मिले इस नोटिस के बाद अब सभी की नजर बैंक के जवाब और आगे की कार्रवाई पर रहेगी।

फिलहाल बैंक मामले की समीक्षा कर रहा है और GST विभाग के नोटिस का जवाब तय प्रक्रिया के अनुसार दिया जाएगा।

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