RBI के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा

Update: 2026-06-06 11:13 GMT

नई दिल्ली : केंद्रीय सरकार ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया है। यह घोषणा RBI ने शुक्रवार को की। इस नए आदेश के अनुसार, जानकीरमन का कार्यकाल 26 जून, 2026 से दो साल और लागू होगा।

स्वामीनाथन जानकीरमन RBI के सबसे सीनियर डिप्टी गवर्नर हैं। उन्होंने पहली बार 26 जून, 2023 को यह पद संभाला था। जानकीरमन की जिम्मेदारी बैंक के कई महत्वपूर्ण विभागों की देखरेख करना है, जिसमें सुपरविज़न, इंस्पेक्शन, कंज्यूमर एजुकेशन और प्रोटेक्शन, फाइनेंशियल इनक्लूजन और ह्यूमन रिसोर्स शामिल हैं।

RBI के अधिकारियों के अनुसार, जानकीरमन के अनुभव और विशेषज्ञता को देखते हुए उनके कार्यकाल को बढ़ाना वित्तीय संस्थान की स्थिरता और नीति संचालन के लिए महत्वपूर्ण कदम है। जानकीरमन ने बैंकिंग सुपरविज़न, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्रों में कई नए उपाय लागू किए हैं, जिससे भारतीय बैंकिंग प्रणाली और आम जनता दोनों को लाभ मिला है।

जानकीरमन की अगुवाई में RBI ने कंज्यूमर एजुकेशन और प्रोटेक्शन के क्षेत्र में कई डिजिटल और ऑनलाइन पहल शुरू की हैं। इन पहलों का उद्देश्य ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के बारे में जागरूक करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। इसके अलावा, फाइनेंशियल इनक्लूजन के लिए जानकीरमन ने छोटे बैंक और ग्रामीण शाखाओं तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के कई प्रोजेक्ट लॉन्च किए हैं।

ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट की देखरेख के तहत जानकीरमन ने बैंक के कर्मचारियों की ट्रेनिंग और कैरियर डेवलपमेंट कार्यक्रमों को भी मज़बूत किया है। इससे RBI में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता और प्रदर्शन में सुधार हुआ है।

RBI सूत्रों के अनुसार, जानकीरमन का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय केंद्रीय बैंक के स्थिर संचालन और मौद्रिक नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखकर लिया गया है। उनकी देखरेख में वित्तीय निगरानी और सुपरविज़न सिस्टम और अधिक प्रभावी हो गया है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास और पारदर्शिता बनी रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI के डिप्टी गवर्नर के रूप में जानकीरमन का अनुभव और नीति निर्माण में योगदान भारतीय वित्तीय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। उनका कार्यकाल बढ़ने से मौद्रिक नीति, वित्तीय समावेशन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन जैसी नीतियों के सुचारू कार्यान्वयन को गति मिलेगी।

जानकीरमन के कार्यकाल विस्तार से बैंकिंग क्षेत्र और आम निवेशकों के लिए स्थिरता और विश्वास का संदेश गया है। इससे न केवल मौजूदा नीतियों का बेहतर क्रियान्वयन होगा, बल्कि आने वाले समय में वित्तीय क्षेत्र में सुधार और विकास की दिशा में भी मदद मिलेगी।

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