ईरान-US समझौते की उम्मीद से बाजार में बढ़ा उत्साह, इन शेयरों पर नजर

तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों को सीधा फायदा मिलेगा।

Update: 2026-06-16 11:00 GMT

New Delhi नई दिल्ली : नई दिल्ली में 16 जून को शेयर बाजार में उन कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखी गई जो सीधे तौर पर तेल और गैस सेक्टर से जुड़ी हुई हैं। यह तेजी उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते (Iran-US Deal) की संभावना और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह समझौता आगे बढ़ता है और होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग दोबारा पूरी तरह से खुलते हैं, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन में स्थिरता आ सकती है। इससे कच्चे तेल (क्रूड ऑयल), LPG और लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आने की उम्मीद है। इसी कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), गैस ट्रांसमिशन फर्मों और LNG आयात करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आने पर डाउनस्ट्रीम कंपनियों की मार्जिन स्थिति बेहतर हो सकती है। डाउनस्ट्रीम सेक्टर में वे कंपनियां आती हैं जो रिफाइनिंग, फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन और गैस सप्लाई का काम करती हैं। इनकी कमाई सीधे तौर पर इनपुट कॉस्ट पर निर्भर करती है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों को सीधा फायदा मिलेगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन में स्थिरता आने से देश की ऊर्जा कंपनियों की लागत घट सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लोबल ऑयल मार्केट काफी अस्थिर है और किसी भी राजनीतिक बदलाव का तुरंत असर कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों को सेक्टर में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

कुल मिलाकर, ईरान-US डील की उम्मीद ने ऑयल और गैस सेक्टर में सकारात्मक माहौल बनाया है। निवेशकों की नजर अब आगे की कूटनीतिक बैठकों और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पर टिकी हुई है।

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