हरारे: जिम्बाब्वे अपनी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को तेज, सस्ता और ज्यादा इंटरऑपरेबल बनाने के लिए भारत के UPI मॉडल की ओर देख रहा है। देश का केंद्रीय बैंक NPCI International Payments Ltd (NIPL) के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस तकनीक पर आधारित एक घरेलू रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम विकसित किया जा सके। बातचीत के 31 अक्टूबर 2026 तक किसी समझौते पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
जिम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक के गवर्नर जॉन मुशायावान्हु के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य देश के बैंकों, मोबाइल-मनी ऑपरेटरों, फिनटेक कंपनियों और अन्य भुगतान सेवा प्रदाताओं को एक साझा डिजिटल ढांचे से जोड़ना है। इससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच पैसे का ट्रांसफर तुरंत हो सकेगा और भुगतान की लागत घटने की उम्मीद है।
यह पहल केवल भारत में इस्तेमाल होने वाले UPI ऐप्स को जिम्बाब्वे में शुरू करने की योजना नहीं है। इसका मकसद UPI के पीछे की तकनीक और सिस्टम आर्किटेक्चर का इस्तेमाल करके जिम्बाब्वे के लिए एक स्थानीय भुगतान नेटवर्क तैयार करना है। यानी वहां के बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने ग्राहकों को देश के भीतर तुरंत भुगतान और ट्रांसफर की सुविधा दे सकेंगी।
अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो छोटे मूल्य के घरेलू भुगतानों में कार्ड पर निर्भरता कम हो सकती है। खाते से खाते में तुरंत ट्रांसफर सस्ता विकल्प बन सकता है और छोटे व्यापारियों को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करना आसान हो सकता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे नए वित्तीय उत्पाद और सेवाएं विकसित करने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को भी बेहतर आधार मिलेगा।
जिम्बाब्वे सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर छोटी और मध्यम कंपनियों की आर्थिक गतिविधियों का बेहतर डेटा भी हासिल करना चाहती है। डिजिटल लेन-देन बढ़ने से अर्थव्यवस्था के उन हिस्सों को समझना आसान हो सकता है, जो अभी बड़ी मात्रा में नकद लेन-देन पर निर्भर हैं।
भविष्य में इस सिस्टम को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और रेमिटेंस के लिए भी इस्तेमाल करने की संभावना है, हालांकि अभी इसका फोकस घरेलू भुगतान प्रणाली बनाने पर है। जिम्बाब्वे जैसे देश के लिए विदेशों से आने वाली रकम महत्वपूर्ण है, इसलिए लंबे समय में सस्ता और तेज अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर भी बड़ा फायदा बन सकता है।
NPCI International इससे पहले भी दूसरे देशों के साथ UPI जैसी घरेलू भुगतान प्रणाली विकसित करने पर काम कर चुका है। नामीबिया, पेरू और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों के साथ इस तरह के सहयोग सामने आ चुके हैं। जिम्बाब्वे के साथ बातचीत इसी अंतरराष्ट्रीय विस्तार का अगला कदम मानी जा रही है।
भारत में UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर 752 बैंक लाइव थे और करीब 24.5 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रही।
अगर जिम्बाब्वे और NPCI International के बीच समझौता हो जाता है, तो यह भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक के वैश्विक विस्तार का एक और बड़ा उदाहरण होगा। फिलहाल बातचीत जारी है और अंतिम समझौते के बाद ही सिस्टम की लॉन्च टाइमलाइन, तकनीकी ढांचा और भागीदार संस्थानों की पूरी तस्वीर साफ होगी।
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