नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए मेडिकल क्लेम से जुड़ा महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। **केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS)** ने कंसल्टेशन, मेडिकल टेस्ट, जांच और रेफरल से जुड़े मौजूदा नियमों को स्पष्ट किया है। खास तौर पर **₹3,000 तक और ₹3,000 से अधिक लागत वाली जांच** को लेकर स्थिति साफ की गई है। नए स्पष्टीकरण के मुताबिक कुछ महंगी जांच कराने से पहले CGHS का रेफरल जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर मेडिकल रिइम्बर्समेंट क्लेम के दौरान परेशानी हो सकती है।
यह स्पष्टीकरण संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में आया है। मेडिकल क्लेम की जांच के दौरान कंसल्टेशन, टेस्ट और रेफरल को लेकर बार-बार सवाल सामने आ रहे थे। इसके बाद CGHS ने **11 अगस्त 2026 के ऑफिस मेमोरेंडम** के जरिए मौजूदा दिशानिर्देशों की स्थिति स्पष्ट की।
₹3,000 तक की जांच के लिए क्या नियम?
अगर किसी CGHS-इम्पैनल्ड अस्पताल या हेल्थ केयर ऑर्गनाइजेशन के विशेषज्ञ डॉक्टर ने कोई जांच लिखी है और **प्रत्येक टेस्ट या जांच की लागत ₹3,000 तक है**, तो ऐसी जांच से जुड़े नियमों को सरल रखा गया है। फॉलो-अप के दौरान ऐसी जांच उसी संबंधित सुविधा में कराई जा सकती है।
इसका उद्देश्य लाभार्थियों को छोटी जांच के लिए बार-बार अलग से रेफरल लेने की परेशानी से बचाना है। हालांकि लाभार्थी को डॉक्टर की सलाह, पर्ची और जांच से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए, क्योंकि मेडिकल रिइम्बर्समेंट क्लेम के समय इनकी जरूरत पड़ सकती है।
₹3,000 से ज्यादा की जांच में रेफरल जरूरी
सबसे महत्वपूर्ण नियम **₹3,000 से अधिक लागत वाली जांच** को लेकर है। CGHS ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सीमा से ज्यादा कीमत वाली जांचों के लिए पहले आवश्यक रेफरल प्रक्रिया का पालन करना होगा।
खास तौर पर **CT Scan, MRI और PET Scan** जैसी विशेष जांचों के लिए CGHS से रेफरल की आवश्यकता होगी। यानी विशेषज्ञ डॉक्टर ने जांच लिख दी है तो भी लाभार्थी को सीधे किसी सेंटर पर जांच करवाकर बाद में रिइम्बर्समेंट मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि संबंधित जांच के लिए आवश्यक CGHS रेफरल या अनुमति पूरी की गई है।
दूसरे सेंटर पर जांच कराने में रखें ध्यान
अगर डॉक्टर ने जांच लिखी है लेकिन लाभार्थी उसे उसी अस्पताल में कराने के बजाय किसी दूसरे CGHS-इम्पैनल्ड अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में करवाना चाहता है, तो लागू रेफरल नियमों का ध्यान रखना जरूरी होगा।
खासकर महंगी जांच के मामले में अपनी सुविधा से सेंटर बदलने से पहले CGHS वेलनेस सेंटर या संबंधित विभाग से प्रक्रिया की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। इससे बाद में मेडिकल बिल के रिइम्बर्समेंट के दौरान आपत्ति लगने की संभावना कम होगी।
सात दिन तक वैध रहेगी कंसल्टेशन
CGHS ने डॉक्टर की कंसल्टेशन की वैधता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। एक ही स्पेशियलिटी में कंसल्टेशन **सात दिन की अवधि** के लिए वैध मानी जाएगी। इस दौरान संबंधित फॉलो-अप और निर्धारित नियमों के तहत जांच कराई जा सकती है।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार डॉक्टर पहली मुलाकात में जांच लिखते हैं और रिपोर्ट आने के बाद मरीज को दोबारा दिखाना पड़ता है। ऐसे मामलों में सात दिन की वैधता लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाती है।
मेडिकल क्लेम के लिए दस्तावेज रखें सुरक्षित
CGHS मेडिकल रिइम्बर्समेंट क्लेम करते समय सही दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। CGHS की मेडिकल रिइम्बर्समेंट FAQ के मुताबिक क्लेम के साथ निर्धारित MRC फॉर्म, चेकलिस्ट, जरूरत के अनुसार डिस्चार्ज समरी, रेफरल या परमिशन स्लिप, अस्पताल के मूल बिल और रसीदें तथा वैध CGHS कार्ड की कॉपी जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
इसलिए कर्मचारी और पेंशनर्स को जांच कराने के बाद डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन, रेफरल, टेस्ट रिपोर्ट, बिल और भुगतान की रसीद संभालकर रखनी चाहिए।
कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए क्यों जरूरी है स्पष्टीकरण?
CGHS के तहत बड़ी संख्या में केंद्रीय सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और पात्र आश्रित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते हैं। मेडिकल क्लेम के मामलों में नियमों की अलग-अलग व्याख्या होने से कई बार लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब ₹3,000 तक की जांच और उससे अधिक लागत वाली जांच को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट होने से कर्मचारियों और पेंशनर्स को पहले से पता रहेगा कि कब रेफरल की जरूरत है।
सबसे जरूरी बात यह है कि इसे **₹3,000 से अधिक के हर मेडिकल बिल की अलग जांच** वाला नियम न समझें। स्पष्टीकरण मुख्य रूप से निर्धारित मेडिकल टेस्ट और विशेष जांचों के लिए रेफरल प्रक्रिया से जुड़ा है। महंगी CT, MRI और PET जैसी जांच कराने से पहले CGHS की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।
इसलिए किसी महंगी जांच से पहले संबंधित CGHS वेलनेस सेंटर से रेफरल की जरूरत की पुष्टि कर लेना मेडिकल क्लेम में बाद की परेशानी से बचा सकता है।