मुंबई: अमेरिकी और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की धारणा पर वैश्विक अनिश्चितता का दबाव रहा, जिसके चलते बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुला।

शुक्रवार सुबह शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 298.75 अंक गिरकर 77,760.21 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 74.20 अंक की गिरावट के साथ 24,321.90 पर कारोबार करता नजर आया।

बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध ने निवेशकों में चिंता बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं।

शेयर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव का असर अक्सर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ता है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

सेंसेक्स में शामिल प्रमुख कंपनियों में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, इंटरग्लोब एविएशन, टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड और आईटीसी के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स को नीचे खींचने का काम किया।

बाजार में आईटी, बैंकिंग, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। वैश्विक घटनाक्रमों के कारण इन सेक्टरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। खासकर मेटल और ऑयल से जुड़े शेयरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति का सीधा असर पड़ता है।

इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। निवेशक वैश्विक संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर काफी हद तक निर्भर करेगी। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं, तनाव कम होने की स्थिति में निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हो सकता है।

भारतीय शेयर बाजार पर घरेलू कारकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का भी प्रभाव पड़ता है। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, डॉलर की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।

निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों ने लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है, जबकि छोटे समय के निवेशकों को वैश्विक संकेतों को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत बताई है।

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। हालांकि, कुल मिलाकर वैश्विक तनाव के कारण बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है।

अमेरिका-ईरान गतिरोध आने वाले दिनों में बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बना रहेगा। निवेशक इस घटनाक्रम से जुड़े हर अपडेट पर नजर रख रहे हैं। यदि कूटनीतिक स्तर पर कोई सकारात्मक खबर आती है तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है।

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कारोबार कर रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में आई शुरुआती गिरावट ने यह संकेत दिया है कि निवेशक जोखिम को लेकर सतर्क हैं और बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।

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