मुंबई: भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। निवेशकों ने शुरुआती महंगाई की चिंताओं को पीछे छोड़ दिया, जिससे लगातार दूसरे हफ्ते बाजार में तेजी बनी रही। खासकर, तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए केंद्रीय बैंक की 'स्पेशल डॉलर विंडो' से रुपये में सुधार आने के बाद बाजार को काफी मदद मिली।
इस हफ्ते निफ्टी में 2.78% की बढ़त रही। आखिरी कारोबारी दिन इसमें 0.65% का उछाल आया और यह 23,146 के स्तर पर पहुंच गया।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 413 अंक या 0.56% की तेजी के साथ 74,729 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते के दौरान इसमें 3.11% की बढ़त दर्ज की गई।
हफ्ते की शुरुआत में बाजार का सेंटिमेंट थोड़ा कमजोर हुआ था। इसकी वजह थी कंज्यूमर महंगाई का भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहनशीलता सीमा (टॉलरेंस बैंड) के ऊपरी स्तर के करीब होना, और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का उम्मीद से ज्यादा आना। इन वजहों से बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।
केंद्रीय बैंक ने अतिरिक्त लिक्विडिटी को सोखने के लिए 'कैश रिजर्व रेशियो' (CRR) की दैनिक जरूरत को बढ़ा दिया, जिससे बाजार में थोड़ी सतर्कता बढ़ गई। हालांकि, जानकारों का कहना है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए केंद्रीय बैंक की 'स्पेशल डॉलर विंडो' और हेजिंग के कड़े नियमों के चलते रुपये में रिकवरी आई, जिससे बाजार का भरोसा फिर से मजबूत हुआ।
जानकारों ने आगे कहा कि LTCG टैक्स और STT की समीक्षा की उम्मीदों, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान (रिस्क ऐपेटाइट) फिर बढ़ा है। इससे निवेशक उन शेयरों की ओर आकर्षित हुए जिनके Q2FY27 (वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही) के बिजनेस अपडेट मजबूत रहे। हालांकि, यह तेजी मुख्य रूप से लार्ज-कैप शेयरों तक ही सीमित रही, जबकि मिड-कैप शेयरों में मामूली बढ़त दिखी और स्मॉल-कैप शेयर हल्की गिरावट के साथ बंद हुए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि मैक्रोइकॉनॉमिक और अर्निंग्स (कमाई) से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए, निवेशकों को बहुत सोच-समझकर शेयर चुनने चाहिए, अपनी पोजीशन साइजिंग को अनुशासित रखना चाहिए और हेजिंग के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मजबूत अर्निंग्स और मैनेजमेंट की सकारात्मक टिप्पणियों के दम पर IT (सूचना प्रौद्योगिकी) सेक्टर का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। वहीं, हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सेक्टर पीछे रह गए, क्योंकि निवेशकों ने उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जहां निकट भविष्य में कमाई की संभावनाएं ज्यादा मजबूत दिख रही थीं।
दूसरी ओर, कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मार्जिन घटने की चिंताओं के चलते FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) शेयरों पर दबाव देखने को मिला।
ब्रॉड मार्केट इंडेक्स का प्रदर्शन भी काफी हद तक बेंचमार्क इंडेक्स जैसा ही रहा। इस हफ्ते निफ्टी मिडकैप 100 में 0.58% की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.12% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, बाजार की धारणा में सुधार आने और इस हफ्ते बिकवाली में भारी कमी आने के बाद, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में 11.66 अरब रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
FIIs लगातार नौवें हफ्ते शुद्ध बिकवाल बने रहे, लेकिन उनकी साप्ताहिक बिकवाली पिछले हफ्ते के 302.94 अरब रुपये से घटकर 89.91 अरब रुपये रह गई। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) लगातार नौवें हफ्ते 78.13 अरब रुपये की शुद्ध खरीदारी के साथ शुद्ध खरीदार बने रहे, हालांकि शुक्रवार को वे 36.61 अरब रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे।
विश्लेषकों का कहना है कि यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कमाई में होने वाली वृद्धि IT क्षेत्र से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों तक कितनी फैलती है। इस दौरान फाइनेंशियल, कंजम्पशन और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों के रेवेन्यू और मार्जिन पर खास नजर रहेगी।
निवेशकों की नजर भारत के अक्टूबर PMI आंकड़ों पर है, जिनसे घरेलू मांग की स्थिति का पता चलेगा। वहीं, अमेरिका के 'जॉबलेस क्लेम' (बेरोजगारी भत्ते के दावे) और जापान के महंगाई के आंकड़े वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।