नई दिल्ली। सावन के तीसरे सोमवार यानी **17 अगस्त 2026** को चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की खास नजर रही। घरेलू कमोडिटी बाजार में चांदी करीब **₹2.36-₹2.38 लाख प्रति किलोग्राम** के दायरे में कारोबार करती दिखाई दी। MCX पर सितंबर कॉन्ट्रैक्ट दोपहर के आसपास करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो था, जबकि व्यापक बाजार में चांदी का रुझान मजबूत बना हुआ था। अलग-अलग रिटेल बाजारों और डेटा स्रोतों में चांदी के भाव में अंतर भी दिखाई दिया, इसलिए ₹2.37 लाख को बाजार के आसपास का स्तर समझना ज्यादा उचित है, न कि पूरे देश का एक समान रिटेल भाव।
चांदी में हालिया मजबूती के पीछे सिर्फ सावन या घरेलू खरीदारी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी, अमेरिकी डॉलर की चाल, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारण इसकी कीमत को प्रभावित कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी मजबूत
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत में जोरदार तेजी देखने को मिली। स्पॉट सिल्वर **3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 65 डॉलर प्रति औंस के ऊपर** पहुंच गई और करीब दो महीने के उच्च स्तर पर कारोबार करती दिखाई दी। इसका असर भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ा।
भारत में चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय भाव से सीधे प्रभावित होती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत और घरेलू मांग भी कीमत तय करने में भूमिका निभाती है।
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी से मिला सहारा
चांदी की तेजी के पीछे अमेरिकी डॉलर की कमजोरी भी एक महत्वपूर्ण कारण रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी आमतौर पर डॉलर में खरीदे-बेचे जाते हैं। डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए कीमती धातुएं अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं।
सोमवार को कमजोर डॉलर और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर नरम होती उम्मीदों ने चांदी को समर्थन दिया।
अमेरिकी ब्याज दरों पर बाजार की नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति चांदी और सोने की कीमतों के लिए बड़ा फैक्टर है। पिछले दिनों आए अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में निकट भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर बाजार की धारणा नरम हुई है। इससे कीमती धातुओं को समर्थन मिला।
सोना और चांदी ब्याज नहीं देते हैं। ऐसे में जब बाजार को लगता है कि ब्याज दरें बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेंगी या आगे नरमी आ सकती है, तो बुलियन में निवेश की दिलचस्पी बढ़ सकती है।
पश्चिम एशिया के तनाव का भी असर
सोना-चांदी की कीमतों पर पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर भी बना हुआ है। अमेरिका और ईरान से जुड़े तनाव तथा क्षेत्र में जारी अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ आकर्षित किया है।
पिछले सप्ताह भी मध्य पूर्व के तनाव और तेल की कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंताओं ने कीमती धातुओं को समर्थन दिया था।
हालांकि चांदी पूरी तरह सोने जैसा सुरक्षित निवेश नहीं मानी जाती, क्योंकि इसका बड़े पैमाने पर औद्योगिक इस्तेमाल भी होता है। इसलिए इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
इंडस्ट्रियल डिमांड चांदी की बड़ी ताकत
चांदी की खासियत यह है कि यह कीमती धातु होने के साथ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल **सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल** समेत कई उद्योगों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीद भी चांदी की कीमतों को सहारा देती है।
यही दोहरी मांग चांदी को सोने से अलग बनाती है। निवेशक इसे बुलियन के तौर पर खरीदते हैं, जबकि उद्योगों में भी इसकी लगातार खपत होती है।
सावन की मांग का कितना असर?
सावन के दौरान भारत में सोना-चांदी और धार्मिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी बढ़ सकती है। चांदी के सिक्के, पूजा सामग्री, आभूषण और अन्य वस्तुओं की मांग स्थानीय सर्राफा बाजार को प्रभावित कर सकती है।
लेकिन सोमवार की कीमतों में बदलाव को केवल सावन के तीसरे सोमवार से जोड़ना सही नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और भू-राजनीतिक तनाव कहीं ज्यादा बड़े कारक रहे। अलग-अलग शहरों में स्थानीय मांग के कारण रिटेल कीमतों में अंतर भी हो सकता है।
आगे क्या रह सकती है चांदी की चाल?
चांदी की आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के संकेतों, डॉलर और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी। औद्योगिक मांग में मजबूती बनी रहती है तो लंबी अवधि में इसे समर्थन मिल सकता है, लेकिन इतनी ऊंची कीमतों पर मुनाफावसूली से तेज गिरावट भी संभव है।
फिलहाल **₹2.37 लाख प्रति किलो के आसपास चांदी** का कारोबार बताता है कि सिल्वर मार्केट में उतार-चढ़ाव काफी अधिक है। इसलिए निवेशकों को केवल हालिया तेजी देखकर फैसला करने के बजाय जोखिम और कीमतों में संभावित बदलाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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