व्यापार ~सोना और चांदी से जुड़े कारोबारियों और बैंकों के लिए आने वाला सप्ताह अहम हो सकता है। GST काउंसिल की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर कुछ चुनिंदा बैंकों और नामित एजेंसियों को मिलने वाली IGST छूट को वापस लेने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो कीमती धातुओं के आयात की मौजूदा टैक्स व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा और विचार के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार छूट को पूरी तरह खत्म करती है, उसमें बदलाव करती है या मौजूदा व्यवस्था को जारी रखती है।
क्या है मौजूदा व्यवस्था?
भारत में सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात को लेकर सरकार ने लंबे समय से एक नियंत्रित व्यवस्था बना रखी है। इन कीमती धातुओं का आयात सभी संस्थाओं के लिए खुला नहीं है। अधिकृत बैंक और नामित एजेंसियां निर्धारित नियमों के तहत इनका आयात करती हैं।
GST व्यवस्था के तहत कुछ निर्दिष्ट बैंकों और अन्य पात्र संस्थाओं को सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर IGST से छूट दी गई है। GST काउंसिल के दस्तावेजों के मुताबिक यह व्यवस्था मुख्य रूप से नामित एजेंसियों और अधिकृत बैंकों के जरिए कीमती धातुओं की आपूर्ति और ज्वेलरी एक्सपोर्ट को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
सरकार समय-समय पर अधिकृत बैंकों और एजेंसियों की सूची को अपडेट करती रही है। 2024 में भी GST काउंसिल ने DGFT की संशोधित सूची के आधार पर पात्र बैंकों और संस्थाओं की सूची को अपडेट किए जाने की जानकारी ली थी।
7 अक्टूबर को क्यों अहम है फैसला?
7 अक्टूबर की बैठक में GST से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाने और टैक्स व्यवस्था में सुधार से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसी पैकेज के तहत सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर कुछ संस्थाओं को मिलने वाली IGST छूट को वापस लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में आ सकता है।
अगर काउंसिल छूट वापस लेने का फैसला करती है तो संबंधित बैंकों और नामित एजेंसियों को आयात के समय IGST का भुगतान करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर उनकी नकदी की जरूरत और आयात की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि, टैक्स का भुगतान होने के बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इसका अंतिम प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए सिर्फ IGST भुगतान शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि पूरी राशि सीधे ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ के रूप में चली जाएगी।
ज्वेलरी कारोबार पर क्या असर पड़ेगा?
सोने और चांदी का इस्तेमाल ज्वेलरी उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए आयात व्यवस्था में बदलाव का असर ज्वेलर्स, बुलियन ट्रेडर्स और एक्सपोर्टर्स पर पड़ सकता है।
मौजूदा व्यवस्था में नामित एजेंसियों के जरिए आयातित कीमती धातुओं की आपूर्ति को लेकर विशेष टैक्स प्रावधान मौजूद हैं। GST काउंसिल ने पहले भी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सोना, चांदी और प्लैटिनम से जुड़े आयात और निर्यात पर टैक्स राहत की व्यवस्था की थी। 2019 में निर्दिष्ट नामित एजेंसियों द्वारा चांदी और प्लैटिनम के आयात पर IGST छूट तथा ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को उनकी आपूर्ति पर राहत की सिफारिश की गई थी।
इसका उद्देश्य खासतौर पर ऐसे ज्वेलरी कारोबारियों को सपोर्ट करना था जो विदेशी बाजारों के लिए आभूषण तैयार करते हैं।
क्या आम ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
अगर IGST छूट खत्म होती है तो सबसे पहला असर आयात करने वाली संस्थाओं के टैक्स भुगतान पर दिखाई देगा। इसके बाद इसका प्रभाव सप्लाई चेन के अलग-अलग स्तरों पर निर्भर करेगा।
सोने और चांदी की कीमतें कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, घरेलू मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इनके दाम पर असर डालती हैं। इसलिए केवल GST छूट में बदलाव को सोने-चांदी की कीमतों में किसी निश्चित बढ़ोतरी का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा।
ज्वेलरी कारोबार में टैक्स लागत बढ़ने पर कारोबारी कीमतों, मार्जिन और कार्यशील पूंजी के स्तर पर इसका असर महसूस कर सकते हैं।
सरकार की चिंता क्या हो सकती है?
IGST छूट की समीक्षा का एक उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना हो सकता है। सरकार GST व्यवस्था में ऐसी प्रक्रियाओं को कम करने पर जोर दे रही है जिनसे कारोबारियों और अधिकारियों के लिए अनुपालन जटिल होता है।
दूसरी तरफ, कीमती धातुओं का कारोबार संवेदनशील क्षेत्र है। सोने और चांदी के आयात पर निगरानी, अधिकृत संस्थाओं की भूमिका और टैक्स अनुपालन को लेकर सरकार लंबे समय से विशेष व्यवस्था रखती आई है।
2026 में DGFT ने भी सोना और चांदी आयात करने के लिए अधिकृत बैंकों की सूची अपडेट की थी। अप्रैल 2026 में जारी सार्वजनिक सूचना के तहत अधिकृत बैंकों की सूची में बदलाव किया गया था।
पहले भी बदलती रही है व्यवस्था
सोने के आयात पर IGST छूट कोई नई व्यवस्था नहीं है। GST लागू होने के बाद ही सरकार ने कुछ नामित एजेंसियों को विशेष राहत देने का फैसला किया था। GST काउंसिल के रिकॉर्ड के अनुसार 2018 से निर्दिष्ट नामित एजेंसियों द्वारा सोने के आयात पर IGST छूट का प्रावधान लागू हुआ था। बाद में चांदी और प्लैटिनम को भी कुछ परिस्थितियों में इस व्यवस्था में शामिल किया गया।
इसके बाद अधिकृत बैंकों और संस्थाओं की सूची में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि केवल निर्धारित और अधिकृत संस्थाएं ही इस विशेष टैक्स व्यवस्था का लाभ उठा सकें।
अब सभी की नजर GST काउंसिल पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 7 अक्टूबर को GST काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है या नहीं। यदि IGST छूट हटाने का फैसला होता है तो सरकार को इसके लागू होने की तारीख, प्रभावित संस्थाओं और संक्रमण अवधि को लेकर भी स्पष्टता देनी होगी।
ज्वेलरी उद्योग, बुलियन कारोबार और आयात से जुड़े बैंक इस फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। दूसरी ओर, आम ग्राहकों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि सोना और चांदी भारतीय बाजार में निवेश के साथ-साथ आभूषण उद्योग के लिए प्रमुख कच्चे माल हैं।
फिलहाल छूट खत्म होने की बात प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम निर्णय 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए अभी इसे सोने-चांदी की कीमतों में तत्काल बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।