वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन चीन से आने वाले सामान पर 7.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इस कदम के बाद दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा व्यापारिक विवाद फिर गहरा सकता है।

बताया जा रहा है कि अमेरिका यह फैसला चीन की कथित अधिक उत्पादन क्षमता (Excess Manufacturing Capacity) और सस्ते उत्पादों की वैश्विक बाजार में बढ़ती पहुंच को लेकर कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चीन की सब्सिडी आधारित उत्पादन नीति से अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है।
चीन के सामान पर बढ़ेगा दबाव
प्रस्तावित 7.5 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद चीन से आयात होने वाले कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, औद्योगिक सामान और अन्य उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हो सकती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नया शुल्क अमेरिका-चीन व्यापार समझौते की मौजूदा व्यवस्था के बीच लागू करने की तैयारी है, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रहे।
ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ा
अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों देशों के बीच टैरिफ बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। अगर चीन जवाबी कार्रवाई करता है और अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाता है, तो एक बार फिर ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बन सकती है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ने और बाजार में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका रहती है।
टैरिफ को लेकर चीन की नाराजगी
चीन पहले भी अमेरिकी टैरिफ नीतियों का विरोध करता रहा है। बीजिंग का कहना है कि व्यापारिक समस्याओं का समाधान बातचीत से होना चाहिए, न कि एकतरफा शुल्क लगाकर। वहीं अमेरिका का तर्क है कि घरेलू उद्योगों और रोजगार को बचाने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
भारत समेत अन्य देशों पर भी असर
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर दोनों देशों के अगले कदमों पर रहेगी। यदि तनाव बढ़ता है तो इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कई कंपनियां पहले से ही चीन के अलावा अन्य देशों में उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं।
आने वाली बैठक पर टिकी नजर
अमेरिका और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच प्रस्तावित बातचीत से पहले यह टैरिफ कदम सामने आया है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों देश एक तरफ दबाव की रणनीति अपना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि चीन इस नए टैरिफ कदम का किस तरह जवाब देता है और क्या इससे वैश्विक व्यापार में नया तनाव पैदा होता है।
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