भारत बनाएगा बड़ा ऊर्जा भंडार, LPG-गैस सुरक्षा योजना को मिलेगी मजबूती

Update: 2026-08-05 11:25 GMT

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बढ़ती अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। सरकार एक नए फंडिंग सिस्टम पर विचार कर रही है, जिसके तहत देश में बड़े पैमाने पर रणनीतिक ईंधन भंडार (Strategic Fuel Reserve) तैयार किया जाएगा। इस योजना के लिए कुकिंग गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के उपभोक्ताओं पर एक विशेष चार्ज लगाने का प्रस्ताव सामने आया है।

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना का उद्देश्य करीब 42 अरब डॉलर के रणनीतिक ऊर्जा भंडार को विकसित करना है। यह कदम हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बाद उठाया जा रहा है, जिनसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद कमजोरियां सामने आई हैं। खासकर ईरान से जुड़े तनाव और उससे पैदा हुई आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने कई देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है।

वर्तमान में भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम मुख्य रूप से कच्चे तेल (Crude Oil) के भंडारण पर केंद्रित है। नई योजना के तहत इसका विस्तार करते हुए इसमें तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) को भी शामिल करने की तैयारी है।

प्रस्तावित रणनीतिक रिजर्व में कच्चे तेल, LNG और LPG के लिए अलग-अलग भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति या वैश्विक आपूर्ति बाधा के समय देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।

सूत्रों के मुताबिक, इस योजना के तहत तैयार होने वाले भंडार से भारत की लगभग दो महीने की कच्चे तेल और LNG की जरूरत पूरी की जा सकेगी। वहीं, LPG का स्टॉक करीब छह सप्ताह की खपत के लिए पर्याप्त रखने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव या आपूर्ति में रुकावट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

सरकार का मानना है कि रणनीतिक ऊर्जा भंडार बढ़ाने से भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलेगी। इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिलेगी, बल्कि अचानक होने वाली वैश्विक घटनाओं के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।

प्रस्तावित फंडिंग मॉडल के तहत LPG और प्राकृतिक गैस का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं से एक छोटा शुल्क लेने पर विचार किया जा रहा है। इस राशि का इस्तेमाल रणनीतिक भंडार बनाने और उसके रखरखाव में किया जा सकता है।

हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले सरकार विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। इसमें उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ, शुल्क की मात्रा और फंड के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उद्योगों, परिवहन और घरेलू जरूरतों के लिए लगातार ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है। ऐसे में तेल के साथ-साथ गैस भंडारण क्षमता बढ़ाना भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अहम कदम हो सकता है।

भारत पहले से ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार योजना के तहत भूमिगत भंडारण सुविधाएं संचालित कर रहा है। नई योजना के माध्यम से इसमें गैस और LPG को शामिल करने से ऊर्जा सुरक्षा का दायरा और व्यापक हो जाएगा।

वैश्विक स्तर पर कई देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक भंडार बनाए रखते हैं। संकट की स्थिति में ये भंडार घरेलू जरूरतों को पूरा करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं।

भारत सरकार का यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, व्यापार मार्गों में बाधाएं और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव ने देशों को आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और इसके अंतिम स्वरूप को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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