नई दिल्ली : देश में कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत ने 25.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) का आयात किया।
केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में घरेलू उत्पादन के साथ-साथ आयात के जरिए किसानों की उर्वरक जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।
पहली तिमाही में 115.72 लाख टन उर्वरक उत्पादन
मंत्री के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश में कुल 115.72 लाख टन उर्वरक का उत्पादन किया गया। इसमें यूरिया और DAP का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अप्रैल से जून 2026 के बीच कुल उत्पादन में यूरिया की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। इस दौरान 71.55 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ। वहीं, DAP का घरेलू उत्पादन 9.84 लाख टन दर्ज किया गया।
किसानों की मांग पूरी करने के लिए आयात
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में शामिल है और खेती के लिए उर्वरकों की मांग काफी अधिक रहती है। घरेलू उत्पादन के बावजूद कई बार मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को पूरा करने के लिए उर्वरकों का आयात करना पड़ता है।
सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन, आयात और वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में 517.74 लाख टन उत्पादन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में कुल 517.74 लाख टन उर्वरक का उत्पादन किया गया था।
इसमें यूरिया का उत्पादन सबसे प्रमुख रहा, क्योंकि यह खेती में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में शामिल है। इसके अलावा DAP और अन्य पोषक तत्व आधारित उर्वरकों का भी उत्पादन किया गया।
यूरिया की कृषि में अहम भूमिका
यूरिया किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाने वाला नाइट्रोजन आधारित उर्वरक है। यह फसलों की वृद्धि और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में धान, गेहूं और अन्य प्रमुख फसलों की खेती में यूरिया की मांग अधिक रहती है। इसी वजह से सरकार इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देती है।
DAP भी प्रमुख उर्वरक
डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक है। इसमें फास्फोरस और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो पौधों के विकास में मदद करते हैं।
देश में DAP की मांग भी काफी अधिक रहती है, इसलिए घरेलू उत्पादन के साथ इसका आयात भी किया जाता है।
सरकार का फोकस आपूर्ति व्यवस्था पर
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों को उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात व्यवस्था मजबूत करने और वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।
सरकार उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठा रही है, ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम की जा सके।