मुंबई: गुरुवार को घरेलू बेंचमार्क इक्विटी सूचकांकों में भारी तेजी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और लगातार बनी हुई महंगाई की चिंताओं को कुछ राहत मिली।
सेंसेक्स 1,533.72 अंक या 2.11 प्रतिशत की उछाल के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 374.65 अंक या 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। निफ्टी के तकनीकी आउटलुक पर विशेषज्ञों ने कहा कि निफ्टी ऊंचे स्तर पर खुलने के बाद सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ। इसमें 'हायर हाई' और 'हायर लो' का क्रम बना रहा, जो बाजार में लगातार खरीदारी की दिलचस्पी को दर्शाता है।
बाजार विशेषज्ञों ने कहा, "इंट्राडे कारोबार के दौरान सूचकांक ने 23,000 के अहम स्तर को फिर से हासिल कर लिया था, लेकिन वह इसके ऊपर टिक नहीं पाया। ऊपर की तरफ, 23,000–23,100 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस (बाधा) जोन बना हुआ है।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर सूचकांक इस दायरे के ऊपर मजबूती से निकल जाता है, तो तेजी का रुझान और मजबूत हो सकता है और यह 23,300–23,400 के स्तर तक जा सकता है।"
विश्लेषकों ने बताया, "नीचे की तरफ, अगर सूचकांक 22,800 के स्तर को नहीं बचा पाता है, तो फिर से बिकवाली का दबाव आ सकता है। इससे सूचकांक 22,600–22,500 के सपोर्ट जोन की तरफ खिसक सकता है।"
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद बाजार के प्रतिभागियों का नजरिया सकारात्मक हो गया। इससे बढ़ती इनपुट लागत और महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुईं, जिसके चलते प्रमुख शेयरों (फ्रंटलाइन स्टॉक्स) में जमकर खरीदारी हुई। निफ्टी में शामिल शेयरों में टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक और भारती एयरटेल सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयर रहे, जिन्होंने बेंचमार्क सूचकांकों को मजबूत सहारा दिया।
हालांकि, व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) का प्रदर्शन मुख्य सूचकांकों के मुकाबले कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.36 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 1.31 प्रतिशत नीचे आ गया।
इस दौरान अलग-अलग सेक्टर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। टेक्नोलॉजी शेयरों में जोरदार खरीदारी के चलते निफ्टी आईटी सूचकांक सबसे आगे रहा, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। NSE पर सेक्टोरल इंडेक्स में 'निफ्टी प्राइवेट बैंक' इंडेक्स सबसे ज्यादा बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। विश्लेषकों का मानना ​​है कि "निकट भविष्य में यह तेजी कितनी बनी रहेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि Q2 के नतीजों में रेवेन्यू और मार्जिन कैसे रहते हैं, बाजार में कितनी व्यापक भागीदारी होती है, और क्या विदेशी निवेश की वापसी के संकेत मिलते हैं। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक महंगाई के जोखिमों के बीच, कच्चे तेल की कीमतों और करेंसी (मुद्रा) में स्थिरता बने रहना भी बहुत जरूरी है।"
इस बीच, डॉलर इंडेक्स में नरमी, कच्चे तेल की स्थिर कीमतों और घरेलू शेयर बाजारों में आई जोरदार तेजी के चलते रुपये में मजबूती दिखी। रुपया लगभग 9 पैसे की बढ़त के साथ 95.05 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
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