नई दिल्ली। देश के बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक ने सुभाष चंद्रा से जुड़े मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के खिलाफ अपील करने की संभावना जताई है। बैंक ने गुरुवार को कहा कि वह इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
मामला बैंकरप्सी कोर्ट एनसीएलटी के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एचडीएफसी बैंक के कुल दावे का केवल एक छोटा हिस्सा ही स्वीकार किया गया है। बैंक के अनुसार, उसके करीब 680 करोड़ रुपये के दावे में से केवल 3.2 प्रतिशत राशि को ही मंजूरी मिली है।
एचडीएफसी बैंक का कहना है कि उसने इस प्रस्ताव का विरोध किया था और मतदान के दौरान इसके खिलाफ वोट किया था। अब बैंक एनसीएलटी के फैसले को चुनौती देने के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार कर रहा है।
680 करोड़ रुपये के दावे पर विवाद
एचडीएफसी बैंक ने बताया कि संबंधित मामले में उसका कुल दावा लगभग 680 करोड़ रुपये का था। लेकिन एनसीएलटी के आदेश के तहत स्वीकार की गई राशि दावे की तुलना में काफी कम है।
बैंक के अनुसार, इतने बड़े अंतर के कारण वह आदेश की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अपील दाखिल कर सकता है। बैंक का मानना है कि उसके दावे और मामले से जुड़े तथ्यों पर उचित विचार किया जाना चाहिए।
हालांकि, बैंक ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस समय सीमा में और किस अदालत या प्राधिकरण के सामने अपील करेगा।
प्रस्ताव के खिलाफ किया था मतदान
एचडीएफसी बैंक ने कहा कि वह संबंधित समाधान प्रस्ताव (Resolution Plan) के पक्ष में नहीं था। बैंक ने क्रेडिटर्स कमेटी (Committee of Creditors) की प्रक्रिया के दौरान इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
बैंक का कहना है कि उसने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं और प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। इसके बावजूद एनसीएलटी की ओर से आदेश पारित किया गया।
अब बैंक इस आदेश के कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है।
दिवाला प्रक्रिया से जुड़ा मामला
यह मामला भारत की दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत चल रही प्रक्रिया से जुड़ा है। जब कोई कंपनी या व्यक्ति कर्ज चुकाने में असमर्थ होता है तो उसके खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू की जाती है।
इस प्रक्रिया में कर्जदाताओं के दावों का मूल्यांकन किया जाता है और समाधान योजना के जरिए भुगतान की व्यवस्था की जाती है। ऐसे मामलों में कई बार बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के दावों को लेकर विवाद सामने आते हैं।
बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण मामला
एचडीएफसी बैंक देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल है और उसके इस मामले में कानूनी कदम उठाने की संभावना को बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े कर्ज मामलों में बैंकों के लिए अपने दावों की वसूली महत्वपूर्ण होती है। यदि दावों का बड़ा हिस्सा स्वीकार नहीं किया जाता है तो बैंक कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
NCLT के फैसलों पर होती है अपील
एनसीएलटी कंपनी मामलों और दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाला प्रमुख न्यायिक निकाय है। इसके आदेशों के खिलाफ संबंधित पक्ष नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील कर सकते हैं।
एचडीएफसी बैंक भी इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने पर विचार कर रहा है।
बैंक ने नहीं दी विस्तृत जानकारी
एचडीएफसी बैंक ने फिलहाल केवल अपील की संभावना की जानकारी दी है। बैंक की ओर से मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं या संभावित कदमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
बैंक का कहना है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए उचित कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब नजर इस बात पर है कि एचडीएफसी बैंक इस मामले में कब तक अपील दाखिल करता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।
यदि बैंक एनसीएलटी के आदेश को चुनौती देता है तो मामले पर दोबारा सुनवाई हो सकती है और दावे की राशि को लेकर नई स्थिति सामने आ सकती है।
फिलहाल सुभाष चंद्रा से जुड़े इस बैंकरप्सी मामले में एचडीएफसी बैंक के संभावित कानूनी कदम पर वित्तीय क्षेत्र की नजर बनी हुई है।