Business :  भारत में लोगों के खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। अब ग्राहक सिर्फ पारंपरिक मिठाइयों और सामान्य मिल्क चॉकलेट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रीमियम और अलग स्वाद वाले उत्पादों को भी पसंद कर रहे हैं। इसी बदलाव के बीच डार्क चॉकलेट की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। बाजार अनुसंधान एजेंसी वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर (Worldpanel by Numerator) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में समाप्त हुए एक साल के दौरान भारत में डार्क चॉकलेट खरीदने वाले परिवारों की संख्या में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और प्रीमियम उत्पादों के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में डार्क चॉकलेट खरीदने वाले परिवारों की संख्या में 28.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा घटकर 11.3 प्रतिशत रह गया था। लेकिन 2026 में इसमें अचानक तेजी आई और वृद्धि दर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञ इसे चॉकलेट उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बदलाव मान रहे हैं।
डार्क चॉकलेट खरीदने वाले परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ी
आंकड़ों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट की लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में इसकी पहुंच अभी सीमित है। देश के कुल परिवारों में लगभग 8.5 प्रतिशत परिवार ही डार्क चॉकलेट खरीद रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस श्रेणी में जिस तेजी से नए ग्राहक जुड़े हैं, उससे आने वाले समय में कारोबार बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
दिलचस्प बात यह है कि घर में इस्तेमाल के लिए खरीदी जाने वाली डार्क चॉकलेट में शहरी उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत है। इससे साफ है कि फिलहाल महानगरों और बड़े शहरों में इसकी मांग सबसे अधिक है। ग्रामीण बाजार में इसकी पहुंच अभी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
क्यों बढ़ रहा डार्क चॉकलेट का क्रेज?
डार्क चॉकलेट की बढ़ती मांग के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें लोगों की आय में बढ़ोतरी, बदलती जीवनशैली, नए स्वाद आजमाने की इच्छा और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता प्रमुख हैं।
आईटीसी फूड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत मलिक के अनुसार, लोगों के पास खर्च करने के लिए उपलब्ध आय बढ़ने और बेहतर जीवनशैली अपनाने की चाह के कारण प्रीमियम खाद्य उत्पादों की मांग मजबूत हो रही है।
जिस तरह भारतीय बाजार में प्रीमियम कॉफी और अन्य खास खाद्य उत्पादों का चलन बढ़ा है, उसी तरह डार्क चॉकलेट भी ग्राहकों की पसंद बन रही है। अब कई लोग अधिक कोको वाली और कम मीठे स्वाद की चॉकलेट को आजमाना चाहते हैं।
सामान्य चॉकलेट से कैसे अलग है डार्क चॉकलेट?
डार्क चॉकलेट में आमतौर पर कोको की मात्रा अधिक होती है। बाजार में 50 प्रतिशत से लेकर 70, 85 और 90 प्रतिशत कोको वाली डार्क चॉकलेट भी उपलब्ध हैं।
सामान्य मिल्क चॉकलेट की तुलना में डार्क चॉकलेट का स्वाद अधिक गहरा और कुछ हद तक कड़वा होता है। इसमें दूध की मात्रा कम या बिल्कुल नहीं हो सकती, जबकि चीनी की मात्रा उत्पाद के अनुसार अलग-अलग होती है।
डार्क चॉकलेट में कोको से मिलने वाले फ्लेवोनॉयड जैसे प्राकृतिक यौगिक मौजूद होते हैं। हालांकि, इसे अपने आप में स्वास्थ्यवर्धक भोजन मानना सही नहीं है। इसमें भी कैलोरी, वसा और चीनी हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य के नजरिए से इसका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है।
15 हजार करोड़ रुपये के बाजार में नए अवसर
भारत में चॉकलेट का बाजार लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। हालांकि, कुल बाजार में डार्क चॉकलेट की हिस्सेदारी अभी छोटी है।
देश में प्रति व्यक्ति सालाना चॉकलेट की औसत खपत करीब 200 ग्राम है। वहीं, ब्रिटेन में यह आंकड़ा 10 किलोग्राम से अधिक है। यह अंतर दर्शाता है कि भारत में चॉकलेट की खपत विकसित बाजारों के मुकाबले अभी काफी कम है।
वर्ल्डपैनल बाय न्यूमरेटर के दक्षिण एशिया के कमर्शियल डायरेक्टर मनोज मेनन के अनुसार, डार्क चॉकलेट अभी एक छोटी श्रेणी है, लेकिन इसकी वृद्धि की रफ्तार उल्लेखनीय है। यदि यही रुझान बना रहता है, तो यह पूरे चॉकलेट बाजार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ऑनलाइन डिलीवरी ने बढ़ाई डार्क चॉकलेट की बिक्री
डार्क चॉकलेट की लोकप्रियता बढ़ाने में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। पहले प्रीमियम चॉकलेट खरीदने के लिए ग्राहकों को बड़े सुपरमार्केट या विशेष दुकानों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए घर बैठे कई तरह की चॉकलेट मंगाई जा सकती हैं।
मोंडेलेज इंडिया के मार्केटिंग उपाध्यक्ष विनय सुब्रमण्यम के मुताबिक, क्विक कॉमर्स और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद डार्क चॉकलेट की मांग बढ़ाने में मदद कर रही है।
ग्राहक अब अधिक कोको वाली चॉकलेट के साथ नए फ्लेवर भी आजमा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, घर के बाहर डार्क चॉकलेट की खरीद और खपत में भी पिछले एक साल के दौरान 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सामान्य चॉकलेट से 3.8 गुना तेज बढ़ रही मांग
फेरेरो रोशे इंडिया सबकॉन्टिनेंट के मार्केटिंग प्रमुख जोहर कापुसवाला के अनुसार, डार्क चॉकलेट की वृद्धि दर पूरे चॉकलेट बाजार की तुलना में लगभग 3.8 गुना अधिक है।
उनके मुताबिक, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और अलग-अलग स्वाद आजमाने की प्रवृत्ति इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
हालांकि, अभी मांग का बड़ा हिस्सा उन शहरी क्षेत्रों से आ रहा है, जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। अधिक कीमत, स्थानीय स्वाद की पसंद और सीमित वितरण व्यवस्था ग्रामीण बाजार में डार्क चॉकलेट की पहुंच बढ़ाने की राह में प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
आने वाले समय में और बढ़ सकता है कारोबार
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती पसंद चॉकलेट कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। कंपनियां अब अलग-अलग कोको प्रतिशत, फ्लेवर और पैकिंग विकल्पों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर सकती हैं।
हालांकि, बाजार का विस्तार इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कंपनियां कीमतों को कितना किफायती बना पाती हैं और छोटे शहरों तक अपने उत्पादों की पहुंच कैसे बढ़ाती हैं।
फिलहाल 45 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत दे रही है कि डार्क चॉकलेट भारतीय उपभोक्ताओं के बीच तेजी से अपनी जगह बना रही है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह लोकप्रियता बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक कितनी पहुंच पाती है।
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