नई दिल्ली। वैश्विक चावल बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत बनाने के लिए बेहतर बंदरगाह सुविधाओं, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के प्रभावी इस्तेमाल और निर्यात अनुकूल सरकारी नीतियों की जरूरत है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 में उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख चावल निर्यातक देशों में शामिल है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए परिवहन व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक नीतियों में सुधार करना आवश्यक है।भारतीय चावल निर्यातक महासंघ की ओर से आयोजित यह तीन दिवसीय सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है। इसमें दुनियाभर के चावल निर्यातक, आयातक, नीति निर्माता और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
चावल निर्यात बढ़ाने के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स जरूरी
सम्मेलन में व्यापार नीति, निर्यात प्रोत्साहन और वैश्विक बाजार में अवसरों को लेकर आयोजित पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि भारत को अपनी निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए परिवहन और बंदरगाह सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना होगा।श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं बोर्ड सदस्य रवि गुप्ता ने कृषि उत्पादों के निर्यात में बेहतर परिवहन और शिपिंग व्यवस्था की अहमियत बताई।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत की मौजूदा लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है?गुप्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में केवल उत्पाद की गुणवत्ता और कीमत ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि विदेशी खरीदारों तक समय पर माल पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
बंदरगाहों की सुविधाओं में सुधार की मांग
रवि गुप्ता ने पूर्वी भारत के बंदरगाहों के बेहतर इस्तेमाल की आवश्यकता जताई। उन्होंने हल्दिया सहित ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बंदरगाहों में कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दियाउनका कहना था कि बंदरगाहों पर माल की आवाजाही आसान बनाने और निर्यात प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करने के लिए व्यापक नीति तैयार की जानी चाहिए।बेहतर परिवहन सुविधाओं से निर्यातकों की लागत कम हो सकती है और भारतीय चावल की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।
मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने की सलाह
पैनल चर्चा में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पूर्व निदेशक और एपीएलओए के वरिष्ठ सलाहकार तरुण बजाज ने मुक्त व्यापार समझौतों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कहा कि शुल्क में कमी और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने से भारतीय निर्यातकों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुल सकते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, निर्यातकों को विभिन्न देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों की जानकारी उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि वे इन समझौतों के तहत मिलने वाली सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
170 से अधिक देशों में पहुंचता है भारतीय चावल
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। भारतीय दूतावास की ओर से प्रकाशित सम्मेलन संबंधी जानकारी के अनुसार, भारत सालाना दो करोड़ मीट्रिक टन से अधिक चावल का निर्यात करता है और इसकी आपूर्ति 170 से अधिक देशों में होती है।सम्मेलन के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क स्थापित करने और नए कारोबारी अवसर तलाशने का मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।
वैश्विक मांग के अनुसार उत्पादन पर जोर
उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार चावल उत्पादन और निर्यात की रणनीति तैयार करनी चाहिए।विभिन्न देशों में चावल की गुणवत्ता, किस्म, पैकेजिंग और आपूर्ति संबंधी आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं। ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार की मांग को समझना और उसी के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।सम्मेलन में निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने, व्यापारिक लागत घटाने और वैश्विक खरीदारों के साथ संबंध मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
किसानों और निर्यातकों को मिल सकता है फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि चावल निर्यात को बढ़ावा मिलने से किसानों, चावल मिल संचालकों, परिवहन कंपनियों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं।बेहतर बंदरगाह सुविधाएं, प्रभावी व्यापार समझौते और निर्यात अनुकूल नीतियां भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति को और मजबूत बना सकती हैं।