EPF को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में बढ़ता भरोसा
रिटायरमेंट के समय यह फंड एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बनता है,
Business व्यापार : केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी गुरुवार, 18 जून 2026 को सूत्रों के हवाले से पीटीआई की एक रिपोर्ट में सामने आई है। इस फैसले से देश के करोड़ों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जो EPF के माध्यम से अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स जमा करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल भी EPF पर 8.25% की ब्याज दर बरकरार रखी गई है। सरकार की मंजूरी के बाद अब EPFO जल्द ही इस ब्याज दर को सभी सब्सक्राइबर्स के खातों में लागू करेगा। माना जा रहा है कि इस महीने के भीतर सात करोड़ से अधिक खाताधारकों के खातों में ब्याज की रकम जमा कर दी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की बचत में बढ़ोतरी होगी।
EPFO देश के लाखों संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स का प्रबंधन करता है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से मासिक योगदान किया जाता है, जो एक तय ब्याज दर पर बढ़ता रहता है। हर वित्त वर्ष के अंत में सरकार EPFO की सिफारिशों और वित्तीय स्थिति को देखते हुए ब्याज दर को मंजूरी देती है।
EPF पर ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया वित्त मंत्रालय के माध्यम से होती है। EPFO पहले अपनी निवेश आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है, जिसे बाद में फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजा जाता है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे आधिकारिक रूप से लागू किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर निवेशकों के लिए स्थिर और सुरक्षित रिटर्न का संकेत है। वर्तमान आर्थिक माहौल में जहां कई निवेश विकल्पों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वहीं EPF एक सुरक्षित बचत योजना के रूप में कर्मचारियों के लिए भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है।
EPFO द्वारा जमा की जाने वाली यह ब्याज राशि कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करती है। रिटायरमेंट के समय यह फंड एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बनता है, जिससे कर्मचारियों को वित्तीय स्थिरता मिलती है।