नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में तेजी से बढ़ रही प्याज की कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार सोमवार, 24 अगस्त से एक बार फिर 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए प्याज की ढुलाई करने की तैयारी में है। इसके साथ ही सरकारी बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारा जाएगा, ताकि अधिक कीमत वाले शहरों में आपूर्ति बढ़ाई जा सके और दाम नियंत्रित हों।

देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार यह पिछले साल की तुलना में करीब 45 प्रतिशत अधिक है, जबकि एक महीने के भीतर कीमत में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुछ बाजारों में कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक हैं। नासिक मंडी में स्थिति और ज्यादा चिंताजनक रही है। पिछले एक महीने के दौरान प्याज के थोक भाव में करीब 76 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के कुछ दूसरे बाजारों में भी थोक कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।
नासिक से बड़े शहरों तक पहुंचेगा प्याज
कांदा एक्सप्रेस के जरिए महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र नासिक से बड़ी मात्रा में प्याज दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा। दिल्ली के अलावा चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों में प्याज पहुंचाने की तैयारी है। इन शहरों में खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक बताई जा रही हैं। सरकार की रणनीति उन बाजारों में अतिरिक्त प्याज पहुंचाने की है, जहां कीमतों में ज्यादा तेजी आई है। बाजार में उपलब्धता बढ़ने से मांग और आपूर्ति के बीच अंतर कम होने तथा कीमतों पर दबाव घटने की उम्मीद है।
बफर स्टॉक भी बाजार में उतारेगी सरकार
सिर्फ कांदा एक्सप्रेस ही नहीं, सरकार अपने बफर स्टॉक का इस्तेमाल भी महंगाई रोकने के लिए करेगी। सरकारी भंडार से प्याज को जरूरत के अनुसार अलग-अलग बाजारों में भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा होने से रोकना और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर प्याज उपलब्ध कराना है। हालांकि इस बार सरकारी बफर स्टॉक का आकार भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक दो साल पहले पांच लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य था, जिसे पिछले वर्ष घटाकर तीन लाख टन और इस बार दो लाख टन किया गया। ऐसे में कीमतों पर सरकारी हस्तक्षेप कितना असर डालता है, इस पर बाजार की नजर रहेगी।
अगस्त-सितंबर में क्यों महंगा होता है प्याज?
प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के दौरान तेजी आने की एक बड़ी वजह फसलों के बीच का अंतर है। इस समय तक रबी सीजन में पैदा हुए प्याज का भंडार धीरे-धीरे कम होने लगता है, जबकि खरीफ की नई फसल बाजार में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचती। इससे सप्लाई पर दबाव बढ़ जाता है। इस साल मौसम की अनिश्चितता और खरीफ प्याज की बुआई में देरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। यदि नई फसल की आवक में और देरी होती है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
पहले भी चलाई जा चुकी है कांदा एक्सप्रेस
कांदा एक्सप्रेस कोई नई व्यवस्था नहीं है। इसकी शुरुआत अक्टूबर 2024 में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी। तब महाराष्ट्र से विशेष मालगाड़ियों के जरिए दिल्ली, लखनऊ और पूर्वोत्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाया गया था। एक रेक में लगभग 1,600 मीट्रिक टन प्याज ढोने की व्यवस्था की गई थी। रेल के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज एक साथ भेजने से परिवहन लागत और समय दोनों कम करने में मदद मिलती है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार भी कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में तेजी से अतिरिक्त स्टॉक पहुंचाया जा सकेगा। फिलहाल आम उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि कांदा एक्सप्रेस और बफर स्टॉक से होने वाली सप्लाई के बाद खुदरा बाजार में प्याज कितनी जल्दी सस्ता होता है। यदि अतिरिक्त आपूर्ति से बाजार में उपलब्धता बढ़ती है तो आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है।
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